अब कचरा फैलाना पड़ेगा महंगा: होटल, मैरिज हॉल और बड़े संस्थानों पर नगर निगम की सख्ती, नियम तोड़े तो जुर्माना तय

अब कचरा फैलाना पड़ेगा महंगा: होटल, मैरिज हॉल और बड़े संस्थानों पर नगर निगम की सख्ती, नियम तोड़े तो जुर्माना तय

एक माह में CPCB पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य, ऑन-साइट कचरा निस्तारण नहीं किया तो होगी कार्रवाई

(Today crime news)

उत्तर प्रदेश कानपुर। शहर को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कानपुर नगर निगम ने बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू करने का फैसला किया है। होटल, मैरिज हॉल, आवासीय सोसायटी (RWA), शिक्षण संस्थान, अस्पताल, मॉल और अन्य बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का हर हाल में पालन करना होगा। नियमों की अनदेखी करने पर चालान, स्पॉट फाइन और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नगर निगम द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार, 20 हजार वर्ग मीटर या उससे अधिक निर्मित क्षेत्रफल,40 हजार लीटर प्रतिदिन या उससे अधिक जल उपयोग अथवा 40 किलोग्राम प्रतिदिन या उससे अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान बल्क वेस्ट जनरेटर (BWG) की श्रेणी में आएंगे। ऐसे सभी संस्थानों को अपने परिसर में ही गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण करना अनिवार्य होगा।

नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से कम्पोस्टिंग या बायोगैस प्लांट के माध्यम से ऑन-साइट निस्तारण करना होगा, जबकि सूखे कचरे को अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से ही निस्तारित किया जाएगा। यदि किसी संस्थान में ऑन-साइट कचरा निस्तारण की व्यवस्था नहीं है, तो उसे नियमानुसार Extended Bulk Waste Generator Responsibility (EBWGR) प्रमाण-पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

एक माह की मोहलत, फिर होगा निरीक्षण

नगर निगम ने सभी बल्क वेस्ट जनरेटर को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के पोर्टल पर एक माह के भीतर अनिवार्य पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद नगर निगम की टीमें शहरभर में निरीक्षण अभियान चलाएंगी। जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां बिना किसी चेतावनी के चालानी कार्रवाई की जाएगी।

5 हजार तक स्पॉट फाइन, कानूनी कार्रवाई भी

नगर निगम ने चेतावनी दी है कि परिसर में गीले कचरे का नियमानुसार निस्तारण नहीं मिलने पर 5,000 तक का स्पॉट फाइन लगाया जा सकता है। यह कार्रवाई जोनल अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी, क्षेत्रीय स्वास्थ्य निरीक्षक अथवा नगर आयुक्त द्वारा अधिकृत अधिकारी करेंगे। गंभीर मामलों में संबंधित संस्थानों के विरुद्ध अन्य दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

नगर निगम का कहना है कि स्वच्छ कानपुर और प्रदूषण मुक्त शहर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब नियमों के पालन में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बड़े संस्थानों को अपनी जिम्मेदारी स्वयं निभानी होगी, अन्यथा आर्थिक दंड के साथ प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

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