2027 चुनाव से पहले कानपुर भाजपा में बगावत का बिगुल, 6 पार्षदों पर कार्रवाई नहीं तो 75 देंगे इस्तीफा
(Today crime news)
उत्तर प्रदेश कानपुर। विधानसभा चुनाव से पहले कानपुर भाजपा में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। भाजपा पार्षद दल के नेता एवं वार्ड-93 गोविंद नगर के पार्षद नवीन पंडित ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर पार्टी के छह बागी पार्षदों पर संगठन की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के 75 पार्षद उनके समर्थन में हैं और संगठन से मांग की है कि संबंधित पार्षदों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। अन्यथा सभी 75 पार्षद सामूहिक इस्तीफा देने को मजबूर होंगे।
नवीन पंडित ने बताया कि इस संबंध में पार्टी पदाधिकारियों को लिखित शिकायत सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी लगातार संपर्क कर मामले के समाधान की मांग की जाएगी। उनका आरोप है कि कुछ पार्षद व्यक्तिगत हितों के लिए पार्टी और संगठन की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
भाजपा पार्षद होकर सदन में करते थे प्रदर्शन
पार्षद दल के नेता ने सदन की चार कार्यवाहियों से निष्कासित भाजपा पार्षद पवन गुप्ता और अंकित मौर्य पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही के दौरान दोनों पार्षद लगातार विरोध-प्रदर्शन करते रहे। कभी खाली बाल्टी लेकर सदन पहुंचना तो कभी फटे कपड़े पहनकर प्रदर्शन करना उनकी आदत बन गई थी, जिससे नगर निगम की गरिमा और पार्टी की छवि प्रभावित हुई।
नवीन पंडित ने कहा कि वर्तमान पार्षदों के कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं और नगर निगम द्वारा सभी वार्डों में समान रूप से विकास कार्य कराए गए हैं। इसके बावजूद कुछ पार्षद लगातार अपने क्षेत्रों की उपेक्षा का आरोप लगाकर पार्टी को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं।
महापौर पर लगाए गए आरोप निराधार, नवीन पंडित
प्रेस वार्ता के दौरान नवीन पंडित ने महापौर प्रमिला पांडेय का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पूरे शहर में विकास कार्य कराए हैं। उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को कोई भी पार्षद अब तक प्रमाणित नहीं कर सका है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी वार्ड के साथ भेदभाव नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ पार्षद बार-बार मीडिया में बयान देकर और विवाद खड़ा कर संगठन को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए पार्टी का मंच हमेशा खुला रहा है।
संगठन तय करे, कार्रवाई या इस्तीफा
नवीन पंडित ने कहा कि भाजपा की छवि को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। इसलिए पार्षद दल के नेता होने के नाते उन्होंने 75 पार्षदों का समर्थन लेकर संगठन के समक्ष स्पष्ट मांग रखी है कि छह बागी पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। यदि संगठन ऐसा नहीं करता है तो समर्थन देने वाले सभी पार्षद इस्तीफा देने को तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी पार्षद को कोई शिकायत थी तो उसे पार्टी संगठन के माध्यम से उठाना चाहिए था, लेकिन कुछ पार्षद सीधे मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री और शीर्ष नेतृत्व तक ज्ञापन लेकर पहुंच रहे हैं, जिससे संगठनात्मक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
बागी पार्षदों में ये नाम शामिल
भाजपा पार्षद दल द्वारा जिन पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है, उनमें निष्कासित पार्षद पवन गुप्ता और अंकित मौर्य के अलावा विकास जायसवाल, लक्ष्मी कोरी, हरिस्वरूप तिवारी और आलोक पांडेय शामिल हैं।
पार्षद :अंकित मौर्यअंकित मौर्य का पलटवार, बोले- जनता ने चुना है, गलत होता तो जीतता नहीं
उधर, भाजपा के बागी पार्षद अंकित मौर्य ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वह जनता के सेवक हैं और जनता ने उन्हें चुनकर सदन में भेजा है।
अंकित मौर्य ने कहा, यदि मैं गलत होता तो जनता मुझे अपना प्रतिनिधि नहीं बनाती। मेरे खिलाफ एक मुकदमा दर्ज है, जो न्यायालय में विचाराधीन है। यदि मैं न्यायालय से निर्दोष साबित होकर बरी होता हूं तो झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने पर भी विचार करूंगा। उन्होंने कहा कि छह पार्षद बिना कारण बागी नहीं बने हैं। उनके अनुसार लंबे समय से उनके वार्डों की उपेक्षा की जा रही है और विकास कार्यों में भेदभाव बरता गया है।
हम छह पार्षद ऐसे ही बागी नहीं हुए हैं। हमारे वार्डों में अपेक्षित विकास कार्य नहीं कराए गए। कई बार समस्याएं उठाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जनता की समस्याओं को लेकर आवाज उठाना हमारा दायित्व है और हम वही कर रहे हैं, अंकित मौर्य ने कहा।
संगठन के फैसले पर टिकी निगाहें
भाजपा पार्षद दल और बागी पार्षदों के बीच बढ़ते टकराव ने कानपुर की सियासत को गर्मा दिया है। एक ओर 75 पार्षद संगठन से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बागी पार्षद अपने क्षेत्रों की उपेक्षा और विकास कार्यों में भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में अब सभी की निगाहें भाजपा संगठन के निर्णय पर टिकी हैं, जो इस विवाद की दिशा और परिणाम तय करेगा।




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