TMC पार्षद के दफ्तर से कंडोम, नकदी और ‘रहस्यमयी पीली डायरी’ मिलने का दावा, बंगाल की राजनीति में मचा बवाल
(Today crime news)
पश्चिम बंगाल कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कोलकाता नगर निगम (KMC) के वार्ड संख्या-109 की तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्षद अनन्या बनर्जी का मुकुंदपुर स्थित वार्ड कार्यालय उस समय सुर्खियों में आ गया, जब वहां से कथित तौर पर कंडोम, मसाज मशीन, नकदी से भरे बॉक्स, शराब की बोतलें और एक रहस्यमयी पीली डायरी बरामद होने का दावा किया गया। इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने ममता बनर्जी सरकार और तृणमूल कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है।
वार्ड कार्यालय में क्या मिला?
स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले कुछ समय से वार्ड कार्यालय में संदिग्ध गतिविधियां देखी जा रही थीं। लोगों का आरोप है कि कार्यालय में असामान्य समय पर लोगों का आना-जाना लगा रहता था, जिससे क्षेत्रवासियों के मन में संदेह पैदा हुआ। सोमवार को कुछ स्थानीय नागरिकों और विपक्षी नेताओं ने कार्यालय का निरीक्षण किया। दावा किया गया कि अंदर एक अलग मेकअप रूम मसाज कुर्सियां, नकदी के बंडल, शराब की बोतलें और कंडोम के पैकेट मौजूद थे। घटनास्थल के कथित वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
पीली डायरी बनी विवाद का केंद्र
पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा एक पीले रंग की डायरी को लेकर हो रही है। आरोप है कि डायरी में कथित आर्थिक लेन-देन, नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली और कुछ प्रमोटरों से जुड़े भुगतान का विवरण दर्ज है। हालांकि अभी तक किसी जांच एजेंसी या प्रशासन की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
कौन हैं अनन्या बनर्जी?
अनन्या बनर्जी कोलकाता नगर निगम की चर्चित महिला पार्षद हैं। राजनीति में आने से पहले वह मॉडलिंग और मनोरंजन जगत से जुड़ी रही हैं। वर्ष 2000 में उन्होंने "मिस कोलकाता" का खिताब जीता था। अंग्रेजी विषय से स्नातक अनन्या पश्चिम बंगाल महिला विकास पहल की अध्यक्ष और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं। बाद में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।
आरोपों पर क्या बोलीं पार्षद?
विवाद बढ़ने के बाद अनन्या बनर्जी ने आरोपों को "राजनीतिक साजिश" करार दिया है। उन्होंने कहा कि मुकुंदपुर कार्यालय की चाबी उनके पास नहीं रहती और वह 8 जून 2026 के बाद से वहां नहीं गई हैं।
पार्षद का कहना है कि कार्यालय में रखा गया कुछ राहत सामग्री का सामान ईद के अवसर पर जरूरतमंद लोगों में वितरित किए जाने के लिए रखा गया था। हालांकि कार्यालय से कथित तौर पर मिले कंडोम, मसाज मशीन और अन्य विवादित वस्तुओं को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी।
विपक्ष ने उठाई जांच की मांग
घटना के बाद भाजपा समेत विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि यदि बरामदगी के दावे सही हैं तो यह केवल एक पार्षद का मामला नहीं बल्कि बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और प्रभाव के दुरुपयोग का संकेत हो सकता है।
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अब इन सवालों पर टिकी नजर
क्या वास्तव में कार्यालय से नकदी और विवादित सामान बरामद हुआ?
कथित पीली डायरी में दर्ज जानकारियां कितनी प्रामाणिक हैं?
क्या नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली का कोई नेटवर्क संचालित हो रहा था?
क्या पुलिस या अन्य जांच एजेंसियां इन आरोपों की पुष्टि करेंगी?
इस विवाद का तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक छवि पर कितना असर पड़ेगा? फिलहाल जांच और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन इस कथित बरामदगी ने बंगाल की राजनीति में नया तूफान जरूर खड़ा कर दिया है।




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