गंगा में गिरने वाले नालों का नगर आयुक्त ने किया औचक निरीक्षण

गंगा में गिरने वाले नालों का नगर आयुक्त ने किया औचक निरीक्षण

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उत्तर प्रदेश कानपुर। गंगा नदी में दूषित जल प्रवाह को लेकर प्रकाशित समाचारों को संज्ञान में लेते हुए नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने सोमवार को रानीघाट स्थित बायो-रिमेडिएशन स्थल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जोनल अभियन्ता मीनाक्षी अग्रवाल, अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ राहुल अवस्थी एवं कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

निरीक्षण में रानीघाट पर बायो-रिमेडिएशन का कार्य क्रियाशील पाया गया। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में गंगा नदी में सात नालों—रानीघाट, गोलाघाट, रामेश्वर घाट, सत्तीचैरा घाट, डबका नाला, गुफ्तारघाट एवं परमिया नाला—का जल बायो-रिमेडिएशन के बाद प्रवाहित किया जा रहा है। वहीं छह नालों—गंदा नाला, हलवाखाड़ा नाला, पनकी थर्मल नाला, अर्रा बिनगवां नाला, सागरपुरी नाला एवं पिपौरी नाला—का उपचारित जल पांडु नदी में छोड़ा जा रहा है। यह कार्य डॉ. हेमंत गुप्ता की संस्था ऑर्गेनिक 121 साइंटिफिक प्रा. लि. द्वारा किया जा रहा है। जोनल अभियन्ता ने बताया कि बायो-रिमेडिएशन एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके तहत सूक्ष्म जीवों की सहायता से प्रदूषकों का विघटन किया जाता है। ट्रायल अवधि में बीओडी और सीओडी में 40 प्रतिशत तथा उसके बाद 70 प्रतिशत तक कमी का लक्ष्य निर्धारित है। जल गुणवत्ता की जांच के लिए नमूने सीएसआईआर को भेजे गए हैं। निरीक्षण के दौरान कुछ स्थलों पर आवश्यक रजिस्टर उपलब्ध न मिलने पर नगर आयुक्त ने नाराजगी व्यक्त की और प्रत्येक स्थल पर जल निकासी, रसायनों की मात्रा एवं परीक्षण से संबंधित रजिस्टर रखने तथा जियोटैग फोटो उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। रानीघाट के समीप कूड़े के ढेर पाए जाने पर तत्काल सफाई कराकर प्रतिदिन स्वच्छता सुनिश्चित करने के आदेश भी दिए गए।

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