टेंडर घोटाले के बीच आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती पर उठे सवाल, नगर निगम ने शुरू की पड़ताल
नियुक्ति पत्र से वेतन तक मांगा जा रहा पूरा ब्योरा, फेस अटेंडेंस का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा; शिकायत के बाद जोन स्तर पर हड़कंप, कर्मचारियों से काम बंद करने को कहा
(Today crime news)
उत्तर प्रदेश कानपुर। नगर निगम में टेंडर घोटाले की जांच के बीच अब आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति भी जांच के दायरे में आ गई है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने सभी छह जोन के अधिकारियों से नगर निगम में कार्यरत निजी और आउटसोर्स कर्मचारियों का विस्तृत ब्योरा तलब किया है। इसमें नियुक्ति पत्र, वेतन, भुगतान की स्थिति, संबंधित कंपनी और कर्मचारियों की फेस अटेंडेंस का रिकॉर्ड शामिल है। जांच की भनक लगते ही कई जोन में ऐसे कर्मचारियों से काम नहीं करने को कहा जाने लगा है। मामला डबल पुलिया, विजयनगर निवासी सुनील कुमार की शिकायत के बाद सामने आया। सुनील के मुताबिक वह जोन-5 के मार्ग प्रकाश विभाग में स्विचमैन के रूप में काम कर रहे थे। उनकी फेस अटेंडेंस आईडी 65092 से दर्ज हुई, लेकिन सात माह से वेतन नहीं मिला। उनका दावा है कि उन्हें नियुक्ति पत्र भी नहीं दिया गया और जोन स्तर पर उनका पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।शिकायत के बाद नगर निगम प्रशासन ने सभी जोन से ऐसे कर्मचारियों की जानकारी मांगी है। अधिकारियों से पूछा गया है कि कर्मचारी को किसने नियुक्त किया, नियुक्ति पत्र दिया गया या नहीं, वेतन कितना निर्धारित था, भुगतान हुआ या नहीं और यदि कर्मचारी किसी निजी कंपनी के माध्यम से तैनात है तो संबंधित कंपनी का पूरा विवरण क्या है। फेस अटेंडेंस मशीनों का रिकॉर्ड भी जांच के लिए मांगा गया है। शिकायत के बाद जोन स्तर पर हलचल बढ़ गई है। एक कर्मचारी ने बताया कि वह जोन-1 में करीब तीन वर्ष से लाइनमैन का काम कर रहा था, लेकिन सोमवार को अचानक उसे काम पर आने से मना कर दिया गया। उसके मुताबिक काम कराने वाले कर्मचारी को हर महीने करीब 10 हजार रुपये दिए जाते थे।
नियुक्ति पत्र के बिना फेस अटेंडेंस का खेल?
नगर निगम में वर्ष 2025 में यूपी डेस्को की ओर से फेस अटेंडेंस मशीन लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। उस समय आउटसोर्स कर्मचारियों के पंजीकरण की प्रक्रिया में नियुक्ति पत्र को लेकर भी सवाल उठे थे। आरोप है कि कई कर्मचारियों की जानकारी आधार कार्ड के आधार पर भेजकर फेस अटेंडेंस मशीन में पंजीकरण कराया गया। अब प्रशासन इस पूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े रिकॉर्ड को खंगाल रहा है।
सुनील के मामले में मार्ग प्रकाश विभाग की ओर से अप्रैल में आधार कार्ड और कर्मचारी कोड भेजे जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि शिकायत सामने आने के बाद जोन-5 के अधिकारी कंपनी के कर्मचारियों पर सुनील का फेस अटेंडेंस पंजीकरण रद्द कराने का दबाव बना रहे हैं। हालांकि, नगर निगम के अनुसार केवल फेस अटेंडेंस दर्ज होना वेतन भुगतान के लिए पर्याप्त नहीं है। संबंधित जोन के अधिकारी को अटेंडेंस प्रमाणित करनी होती है।
बयान
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने कहा कि सभी जोन से ऐसे कर्मचारियों का डेटा मांगा गया है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं नौकरी देने के नाम पर धन उगाही तो नहीं हो रही। मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।



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