रात में चार कत्ल और सुबह तक घर में ठहरे रहे आरोपी! रंगपुर हत्याकांड में पुलिस के दावे से मचा हड़कंप
गमछे से गला घोंटा, बच्चे को भी नहीं छोड़ा, रंगपुर में हिंदू परिवार के चार कत्ल की पूरी कहानी
(Today crime news)
बांग्लादेश रंगपुर। एक ही हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हत्या से सनसनी फैल गई। सेवानिवृत्त शिक्षक, उनकी पत्नी, बेटी और 12 वर्षीय बेटे के शव 22 अगस्त की रात मछुआपाड़ा इलाके में उनके बंद घर से बरामद हुए। शुरुआती जांच में पुलिस को लूट की आशंका थी, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो वारदात की वजह और घटनाक्रम ने जांचकर्ताओं को भी चौंका दिया। पुलिस ने मामले में दो युवकों मुग्ध दास और सिद्धार्थ दास को गिरफ्तार किया है। दोनों को आपस में ममेरे भाई बताया जा रहा है।
पुलिस के मुताबिक, वारदात 20 अगस्त की रात शुरू हुई। दोनों आरोपी कथित तौर पर पड़ोसी इमारत के रास्ते से सेवानिवृत्त शिक्षक गणपति चक्रवर्ती (65) के घर की छत पर पहुंचे और वहां याबा का सेवन कर रहे थे। गणपति ने उन्हें देख लिया और पूछताछ के लिए छत पर पहुंचे। पुलिस का दावा है कि पहचान सामने आने और पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने गणपति के कंधे पर रखे गमछे से उनका गला घोंट दिया।
गणपति की चीख-पुकार सुनकर उनकी पत्नी प्रीतिलता चक्रवर्ती (50) सीढ़ियों की ओर बढ़ीं। आरोप है कि आरोपियों ने सीढ़ियों पर ही उनकी भी गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद उनकी 23 वर्षीय बेटी आगामी चक्रवर्ती प्रार्थी को निशाना बनाया गया। पुलिस के अनुसार सबसे भयावह कड़ी 12 वर्षीय बेटे प्रियम की हत्या रही। जांचकर्ताओं का दावा है कि बच्चा आरोपियों को पहचानता था और उनकी पहचान उजागर होने का डर था, इसलिए उसकी भी हत्या कर दी गई।
हत्या के बाद भी घर में डटे रहे आरोपी
वारदात का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि चार लोगों की हत्या करने के बाद आरोपी तत्काल फरार नहीं हुए। पुलिस के मुताबिक, दोनों करीब छह से सात घंटे तक घर के भीतर ही रहे। इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर याबा का सेवन किया, घर में रखे खजूर और खीरे खाए और स्नान भी किया। जांचकर्ताओं को घटनास्थल से ऐसी गतिविधियों के कथित सुराग मिले हैं।
पुलिस को घर में कुछ चूड़ियों को आग में तपाए जाने के निशान भी मिले। इसके बाद जांच की दिशा सोने के काम से जुड़े लोगों की ओर भी गई। घर से कीमती सामान और आभूषण गायब मिले, जिसके चलते शुरुआत में पुलिस ने इसे लूट के बाद हत्या का मामला माना था।
बंद घर से निकली चार लाशें, जांच में खुलती गई परतें
22 अगस्त की रात परिवार से कई घंटों तक संपर्क नहीं होने पर रिश्तेदारों को शक हुआ। घर से दुर्गंध आने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। दरवाजा खोलने पर चारों के शव अलग-अलग जगहों पर मिले। गणपति का शव छत पर, प्रीतिलता और बेटी आगामी के शव सीढ़ियों के पास, जबकि प्रियम का शव कमरे में पलंग के नीचे मिला।
गणपति पिछले वर्ष 31 दिसंबर को रंगपुर जिला स्कूल से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद वह होम्योपैथिक चिकित्सा से भी जुड़े थे। उनकी बेटी आगामी ने अंग्रेजी में मास्टर्स किया था, जबकि प्रियम रंगपुर जिला स्कूल में पढ़ता था। स्थानीय लोगों के अनुसार गणपति शांत और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे।
पुलिस ने ऐसे दबोचे दोनों आरोपी
मामले की गंभीरता को देखते हुए महानगर पुलिस, डिटेक्टिव ब्रांच और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट समेत कई एजेंसियों ने जांच शुरू की। घटनास्थल से मिले सुरागों और संदिग्ध गतिविधियों को जोड़ते हुए पुलिस मुग्ध दास और सिद्धार्थ दास तक पहुंची। दोनों को 23 अगस्त तड़के हिरासत में लिया गया। पूछताछ के बाद उनकी गिरफ्तारी की गई।
बांग्लादेश संगबाद संस्था (BSS) के अनुसार, पुलिस का दावा है कि पूछताछ में दोनों ने हत्या में अपनी भूमिका स्वीकार की है। पुलिस ने कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल सामान और परिवार से लूटे गए सोने के आभूषण भी बरामद किए हैं।
हालांकि, पुलिस के दावे और आरोपियों का कथित इकबालिया बयान अभी जांच का हिस्सा हैं। अदालत में आरोप साबित होने और दोष तय होने के बाद ही कानूनी रूप से जिम्मेदारी निर्धारित होगी।
फिलहाल रंगपुर की इस वारदात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—एक परिवार के चार लोगों को आखिर इतनी बेरहमी से क्यों खत्म किया गया और हत्या के बाद आरोपी घंटों उसी घर में क्या करते रहे? पुलिस की जांच इन सवालों के जवाब तलाशने में जुटी है।


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