भ्रष्टाचार की जांच में सिर्फ पार्षद ही क्यों? अफसरों और उनके करीबियों की भी खुले फाइल: शालू कनौजिया

भ्रष्टाचार की जांच में सिर्फ पार्षद ही क्यों? अफसरों और उनके करीबियों की भी खुले फाइल: शालू कनौजिया

नगर निगम में टेंडर घोटाले की जांच पर उठाए सवाल, पुलिस कमिश्नर और नगर आयुक्त को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग,परिवार के ठेकेदारी से जुड़े होने पर जांच कराने की दी चुनौती


(Today crime news)

उत्तर प्रदेश कानपुर। नगर निगम में भ्रष्टाचार और टेंडर अनियमितताओं को लेकर चल रही जांच के बीच वार्ड-14 की पार्षद शालू कनौजिया ने जांच के दायरे को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पुलिस कमिश्नर और नगर आयुक्त को पत्र लिखकर पूछा है कि भ्रष्टाचार की जांच में पार्षदों को ही संदेह के घेरे में क्यों रखा जा रहा है? यदि जांच हो रही है तो नगर निगम के अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका भी समान रूप से खंगाली जानी चाहिए। शालू कनौजिया ने पत्र में कहा कि नगर निगम में भ्रष्टाचार की चर्चा और कार्रवाई के बीच पार्षदों की छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है, जबकि पार्षदों के पास न तो ठेकों पर हस्ताक्षर करने का अधिकार है और न ही भुगतान का वित्तीय अधिकार। ऐसे में जांच की प्रक्रिया में सभी की भूमिका और अधिकारों को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने अपने पति एवं पूर्व पार्षद सुनील कनौजिया के साथ मायके और ससुराल पक्ष के सदस्यों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। पत्र में कहा गया है कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य किसी विभाग में ठेकेदारी नहीं करता है। उन्होंने जरूरत पड़ने पर परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड की प्रतियां उपलब्ध कराने की पेशकश भी की है। पार्षद ने मांग की है कि भ्रष्टाचार की जांच में किसी को भी केवल पद या राजनीतिक पहचान के आधार पर निशाना न बनाया जाए। अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल होनी चाहिए। उनका कहना है कि जांच का दायरा सीमित रखने के बजाय सभी संबंधित पक्षों को शामिल किया जाए, ताकि वास्तविक जिम्मेदारों की पहचान हो सके और निष्पक्षता पर सवाल न उठें।

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