मंगल भवन की कमेटी भंग पर महापौर का पलटवार, शासन में खुलेगी फाइल

मंगल भवन की कमेटी भंग पर महापौर का पलटवार, शासन में खुलेगी फाइल

बिना कार्यकारिणी की मंजूरी कमेटी भंग करने का आरोप, महापौर बोलीं- 100 शादियां हो चुकीं, अब शासन से कराऊंगी जांच

(Today crime news)

उत्तर प्रदेश कानपुर। बृजेंद्र स्वरूप पार्क बेनाझाबर स्थित मंगल भवन की कमेटी भंग करने का विवाद अब नगर निगम की चारदीवारी से निकलकर शासन की चौखट तक पहुंचने वाला है। महापौर प्रमिला पांडेय ने गुरुवार को मोतीझील स्थित नगर निगम मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर सीधे सवाल उठाया कि जब कार्यकारिणी और सदन की प्रक्रिया पूरी ही नहीं हुई तो मंगल भवन की कमेटी भंग कैसे कर दी गई? उन्होंने आरोप लगाया कि कमेटी को गलत तरीके से भंग करने के बाद उन्हें उसमें शामिल किया गया। महापौर ने कहा कि पूरे मामले की शिकायत शासन को पत्र भेजकर करेंगी और जांच की मांग उठाएंगी। महापौर ने कहा कि मंगल भवन में अब तक करीब 100 परिवारों की शादियां हो चुकी हैं। ऐसे में कमेटी के गठन, भंग करने की प्रक्रिया और भवन के संचालन को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने संकेत दिया कि मामले में जिम्मेदारी तय कराने के लिए वह शासन स्तर पर शिकायत करेंगी।

जलभराव पर भी अफसरों को कठघरे में खड़ा किया

शहर में जलभराव के लिए नगर निगम और महापौर को जिम्मेदार ठहराए जाने पर उन्होंने अफसरों पर पलटवार किया। महापौर ने कहा कि शहर में 312 तालाबों की स्थिति ही स्पष्ट नहीं है। नजूल और केडीए की जमीनों का भी स्पष्ट हिसाब होना चाहिए। अतिक्रमण हटाने पहुंचने पर जमीन की स्थिति अलग सामने आती है। ऐसे में जलभराव का पूरा दोष नगर निगम और महापौर पर डालना उचित नहीं है। उन्होंने अफसरों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अधिकारी दफ्तरों में बैठकर वेतन लेने के बजाय शहर में निकलें। बाहर निकलेंगे तो जलभराव, गड्ढों और बदहाल जल निकासी की वास्तविक तस्वीर दिखाई देगी। महापौर ने कहा कि हर साल नालों की सफाई और जल निकासी पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। यदि तालाबों को चिह्नित कर उनका इस्तेमाल जल संचयन और निकासी में किया जाए तो इस खर्च को कम किया जा सकता है। शहर की बारिश का पानी एक एक बूंद तालाबों में जाएगा। 

तालाब चिह्नित कराने की मांग

महापौर ने मंडलायुक्त और केडीए से शहर के तालाबों को चिह्नित कराने की मांग की। कहा कि नगर आयुक्त प्रस्ताव दें तो उपलब्ध मद से जरूरी कार्यों को स्वीकृति दी जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी स्वयं पहल नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण शहर जलभराव और गड्ढों की समस्या से जूझ रहा है। कल्याणपुर के तालाब पर कब्जे के मामले का भी उन्होंने उल्लेख किया।

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मंगल भवन पर अब शासन का दरवाजा

महापौर के मुताबिक मंगल भवन कमेटी को कार्यकारिणी और सदन की प्रक्रिया के बिना भंग किया गया। वह शासन को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की जांच की मांग करेंगी।

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100 शादियां, फिर भी सवाल कायम

मंगल भवन में अब तक करीब 100 शादियां होने का हवाला देते हुए महापौर ने कमेटी और भवन संचालन की व्यवस्था पर सवाल उठाए।

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312 तालाबों का हिसाब जरूरी

महापौर ने कहा कि तालाबों को चिह्नित कर जल निकासी व्यवस्था से जोड़ा जाए तो हर साल नालों की सफाई पर होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च को कम किया जा सकता है।

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