स्वाइन फ्लू के 2308 केस, इन्फ्लूएंजा B और कोरोना भी मिला,सरकार ने जारी की एडवाइजरी

स्वाइन फ्लू के 2308 केस, इन्फ्लूएंजा B और कोरोना भी मिला,सरकार ने जारी की एडवाइजरी

(Today crime news)

दिल्ली। H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में तेज बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी में अब तक 2,308 H1N1 केस सामने आ चुके हैं। इसके साथ ही दूसरे तरह के फ्लू और कुछ Covid-19 संक्रमण भी मिले हैं। हालात को देखते हुए दिल्ली सरकार ने लोगों के लिए हेल्थ एडवाइजरी जारी की है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार (25 अगस्त) को हालात की समीक्षा के लिए हाई लेवल मीटिंग बुलाई। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल हुए। उधर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी देश में H1N1 की स्थिति और अस्पतालों की तैयारियों की समीक्षा की।

दिल्ली में कितने केस मिले?

दिल्ली में H1N1 के अब तक 2,308 मामले दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह के मुताबिक, करीब 3,000 मरीज H1N1 और दूसरे फ्लू वेरिएंट के साथ अस्पताल पहुंचे हैं और इलाज के बाद ज्यादातर मरीज ठीक होकर घर लौट रहे हैं।

पंकज सिंह ने कहा, "घबराने की जरूरत नहीं है। दिल्ली में हालात कंट्रोल में हैं। अस्पतालों में पर्याप्त बेड, डॉक्टर और दवाएं मौजूद हैं। अभी तक H1N1 से किसी मौत की सूचना नहीं है और कोई मरीज ICU या वेंटिलेटर पर नहीं है।" दिल्ली के अलावा NCR में भी मामले सामने आए हैं। नोएडा में 120 H1N1 केस, जबकि गाजियाबाद में 7 मामले दर्ज किए गए हैं। सरकार पूरे क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

एक नहीं, तीन वायरस की मौजूदगी

ICMR के डायरेक्टर राजीव बहल ने बताया कि देश में इस समय श्वसन निगरानी (respiratory surveillance) के दौरान तीन तरह के संक्रमण सामने आ रहे हैं। इनमें इन्फ्लूएंजा ए यानी H1N1, इन्फ्लूएंजा बी और कोविड-19 शामिल हैं। फिलहाल H1N1 सबसे ज्यादा फैल रहा है। इन्फ्लूएंजा B के भी करीब 600 से 650 मामले बताए गए हैं। कोविड के कुछ केस भी मिल रहे हैं। हालांकि इसे किसी नए वायरस या किसी नई खतरनाक बीमारी के रूप में नहीं देखा जा रहा है।

राजीव बहल ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद देश की निगरानी व्यवस्था काफी मजबूत हुई है। अब अलग-अलग राज्यों से आने वाले डेटा और लैब रिपोर्ट के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि किस समय कौन सा वायरस ज्यादा फैल रहा है। देशभर में इस निगरानी नेटवर्क में 73 लैब शामिल हैं। गंभीर श्वसन निगरानी वाले मरीजों के सैंपल की हर सप्ताह जांच की जाती है और कई तरह के वायरस की पहचान की जाती है।

क्या फिर कोरोना जैसे हालात हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा स्थिति को कोरोना जैसी नई महामारी के तौर पर देखने की जरूरत नहीं है। राजीव बहल ने साफ किया कि H1N1 मौसमी इन्फ्लूएंजा है। फ्लू वायरस समय के साथ बदलते रहते हैं। इसलिए पिछले साल फ्लू होने का मतलब यह नहीं कि इस साल दोबारा संक्रमण नहीं होगा।

ज्यादातर मरीजों में लक्षण हल्के रहते हैं। लेकिन छोटे बच्चों, 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में गंभीर बीमारी का खतरा ज्यादा हो सकता है।

दिल्ली सरकार ने क्या एडवाइजरी जारी की?

दिल्ली सरकार ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। खासकर भीड़ वाली जगहों पर अतिरिक्त सतर्क रहने को कहा गया है। सरकार की सलाह में respiratory hygiene का ध्यान रखना और जरूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टर से संपर्क करना शामिल है।

भीड़ में मास्क लगाने की सलाह भी दी गई है। साथ ही बार-बार चेहरे को छूने से बचने और ज्यादा छुई जाने वाली सतहों को साफ रखने को कहा गया है। स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि H1N1 के लिए अस्पतालों में अलग 'आइसोलेशन वार्ड' तैयार किए गए हैं।

अगर किसी मरीज को जरूरत के बावजूद बेड नहीं दिया गया तो कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली में सिर्फ फ्लू ही नहीं, डेंगू पर भी निगरानी जारी है। स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक मंगलवार तक राजधानी में करीब 2,200 डेंगू केस सामने आ चुके थे। उन्होंने कहा कि अब तक डेंगू से भी कोई मौत नहीं हुई है।

फ्लू हो जाए तो क्या करें?

राजीव बहल के मुताबिक सामान्य फ्लू के लक्षण होने पर आराम करना, पर्याप्त पानी पीना और पौष्टिक खाना लेना मददगार हो सकता है। आम तौर पर दो से तीन दिन आराम करने से शरीर को रिकवर करने में मदद मिलती है। फ्लू सांस से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के जरिए फैल सकता है।

ये ड्रॉपलेट्स करीब दो मीटर तक जा सकते हैं। इसलिए खांसते या छींकते समय सावधानी रखना और आसपास की चीजों को साफ रखना जरूरी है। एक बात खास है। एंटीबायोटिक दवाओं वायरल फ्लू का इलाज नहीं हैं। गंभीर जोखिम वाले मरीजों में डॉक्टर की सलाह पर एंटी वायरल दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?

अगर फ्लू जैसे लक्षणों के साथ सांस लेने में दिक्कत या सीने में दर्द होने लगे तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। राजीव बहल के अनुसार ऐसे गंभीर मामले कम होते हैं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

फ्लू की वैक्सीन भारत में उपलब्ध हैं। बहल ने बताया कि भारत में दो से तीन फ्लू वैक्सीन लाइसेंस्ड हैं। WHO की सिफारिश के मुताबिक खासकर हाई-रिस्क लोगों के लिए फ्लू वैक्सीनेशन फायदेमंद हो सकता है। हालांकि इसे जरूरी नहीं बताया गया है।

सरकार की तैयारी कितनी मजबूत है?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने देश में H1N1 की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी यानी ILI और गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण यानी SARI के आंकड़े, टेस्टिंग, लेबोरेटरी सर्विलांस और माइग्रेन की तैयारी पर चर्चा हुई। दिल्ली सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है और माइग्रेन में जरूरी जांचें पूरे हैं।


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