बाढ़ का पानी उतरा तो बीमारियों ने घेरा, गंगा बैराज के गांवों में बुखार-डायरिया का प्रकोप
15 दिन से बुखार से तप रहे ग्रामीण, डेंगू-चिकनगुनिया जैसे लक्षणों ने बढ़ाई चिंता; आरोग्यधाम की टीम ने गांवों में पहुंचकर शुरू की निशुल्क स्वास्थ्य सेवा
(Today crime news)
उत्तर प्रदेश कानपुर। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ की मार झेल चुके गंगा बैराज क्षेत्र के गांवों में अब संक्रमण का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने के साथ ही कई गांवों में बुखार, डायरिया, उल्टी-दस्त, शरीर व जोड़ों में दर्द और त्वचा संबंधी बीमारियों के मरीज सामने आ रहे हैं। कई ग्रामीणों ने बताया कि उनके परिवार के बच्चे और बड़े 15 दिन से अधिक समय से बुखार से पीड़ित हैं। कुछ मरीजों में डेंगू और चिकनगुनिया जैसे लक्षण भी देखे गए हैं, हालांकि चिकित्सकीय जांच के बिना बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। गंगा बैराज क्षेत्र के चैनपुरवा, बनिया पूर्वा, डलला पूर्वा, प्रतापपुर हरि, नथथा खेड़ा और भगवानदीन पूर्वा समेत कई गांवों में ग्रामीणों ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जानकारी आरोग्यधाम की टीम को दी।
ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के बाद जगह-जगह जमा पानी, गंदगी और दूषित जल के कारण बीमारी का खतरा बढ़ गया है। कई लोगों ने दाद, खाज, खुजली समेत अन्य चर्म रोगों की शिकायत भी की है। ग्रामीणों के अनुरोध पर आरोग्यधाम के वरिष्ठ होम्योपैथिक फिजिशियन डॉ. हेमंत मोहन अपनी टीम के साथ बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचे। टीम ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी ली और बरसात व बाढ़ के बाद होने वाली बीमारियों से बचाव के उपाय बताए। ग्रामीणों को साफ पानी पीने, पानी को उबालकर या सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक किया गया। डॉ. हेमंत मोहन ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी उतरने के बाद स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। तेज बुखार, लगातार उल्टी-दस्त, अत्यधिक कमजोरी, शरीर में दर्द या अन्य गंभीर लक्षण होने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को निशुल्क होम्योपैथिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
सरकारी सहायता नहीं मिलने का आरोप
स्वास्थ्य समस्याओं के साथ ग्रामीणों ने राहत और पुनर्वास व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें अभी तक सरकारी आर्थिक सहायता और खाद्य सामग्री का पर्याप्त लाभ नहीं मिल सका है। उनका कहना है कि बाढ़ के कारण पहले ही जनजीवन प्रभावित हुआ है और अब बीमारी फैलने से परेशानी और बढ़ गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से खाद्य सामग्री के साथ स्वास्थ्य शिविर और नियमित जांच की व्यवस्था कराने की मांग की है। आरोग्यधाम की टीम में डॉ. हेमंत मोहन, डॉ. आरती मोहन सहित अन्य चिकित्सकों ने ग्रामीणों को हरसंभव स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। अब ग्रामीणों की निगाह स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर है कि बाढ़ प्रभावित गांवों में व्यापक स्वास्थ्य जांच, दवा वितरण, स्वच्छ पेयजल और राहत सामग्री की व्यवस्था कब तक प्रभावी रूप से पहुंचती है।




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