शहर का कूड़ा भी महंगा 400 की दर छोड़ 800 रुपये प्रति टन पर टेंडर, SIT ने खोली फर्म की कुंडली
SIT जांच में सामने आया चौंकाने वाला मामला, शिवपुरी, आगरा और अलीगढ़ में कार्रवाई के बावजूद कानपुर में मिला करोड़ों का काम
(Today crime news)
उत्तर प्रदेश कानपुर। नगर निगम के टेंडर और फर्मों से जुड़े कथित घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। एसआईटी की जांच में अब सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के टेंडर को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। जांच में सामने आया है कि जिन आरोपों के तहत संबंधित फर्म पर शिवपुरी, आगरा और अलीगढ़ में कार्रवाई हुई थी, उसी इनवायरमेंटल टेक्नो फर्म को कानपुर में कूड़ा निस्तारण का काम मिला। इतना ही नहीं, पूर्व में करीब 400 रुपये प्रति टन की दर से होने वाले कार्य के मुकाबले कानपुर में कथित तौर पर 800 रुपये प्रति टन की दर निर्धारित की गई।
फर्म आगरा निवासी ठेकेदार रवि लवानिया से जुड़ी बताई जा रही है। जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन के तहत विभिन्न नगर निकायों में फर्म को काम मिला था। शिवपुरी में काम के दौरान अनियमितताएं सामने आने के बाद टेंडर निरस्त करने और बैंक डिपॉजिट जब्त किए जाने का उल्लेख किया गया है। शिवपुरी नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी की रिपोर्ट भी जांच एजेंसी के सामने आई है।
सिंडिकेट के जरिए कानपुर पहुंचने की भी पड़ताल
एसआईटी अब इस बात की भी जांच कर रही है कि रवि लवानिया की फर्म को कानपुर का करोड़ों रुपये का काम कैसे मिला। जांच में राजस्थान में सक्रिय बताए जा रहे ठेकेदारों के कथित सिंडिकेट और उसके सरगना गोविंद शर्मा की भूमिका भी सामने आने की बात कही गई है। आरोप है कि गोविंद शर्मा के माध्यम से लवानिया की कानपुर में संबंधित लोगों से मुलाकात कराई गई और इसके बाद टेंडर हासिल हुआ।
दोगुनी दर ने बढ़ाए सवाल
जांच का सबसे अहम बिंदु कूड़ा निस्तारण की दर है। अधिकारियों के अनुसार, पहले इसी तरह के काम में करीब 400 रुपये प्रति टन की दर रही है, जबकि संबंधित फर्म को 800 रुपये प्रति टन की दर से काम दिए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में एसआईटी यह जांच कर रही है कि दर दोगुनी करने का आधार क्या था और इससे नगर निगम पर कितना अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा।
अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
अब जांच एजेंसी टेंडर की पूरी प्रक्रिया खंगाल रही है। फर्म की पात्रता, पूर्व रिकॉर्ड का सत्यापन, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन, दर निर्धारण और टेंडर स्वीकृति में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, भ्रष्टाचार से जुड़ी जांच में लगातार नए दस्तावेज और शिकायतें सामने आ रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।


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