टेंडर सिंडिकेट पर SIT का शिकंजा, अब पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन रडार पर

टेंडर सिंडिकेट पर SIT का शिकंजा, अब पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन रडार पर

बाहरी ठेकेदारों पर दबाव बनाने से लेकर रिटेंडरिंग तक की जांच, गोविंद शर्मा के नेटवर्क की खुल रही परतें

(Today crime news)

उत्तर प्रदेश कानपुर। नगर निगम में टेंडर और फर्म रजिस्ट्रेशन में कथित घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे सिंडिकेट की परतें खुल रही हैं। छह एफआईआर के बाद अब एसआईटी की नजर पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन की कथित भूमिका पर है। प्रारंभिक जांच में आरोप सामने आया है कि एसोसिएशन से जुड़े प्रभावशाली लोगों के जरिए पूल से बाहर के ठेकेदारों पर टेंडर न डालने का दबाव बनाया जाता था।जांच के मुताबिक बाहरी ठेकेदारों से काम दिलाने के एवज में रकम मांगी जाती थी। मांग पूरी न होने पर उनके कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाकर प्रदर्शन कराया जाता, भुगतान रुकवाने और सदन में मामला उठाकर फर्म को ब्लैकलिस्ट कराने का दबाव बनाया जाता।

 इसके बाद रिटेंडरिंग के जरिए कथित पूल के ठेकेदारों को काम दिलाने की बात जांच में सामने आई है। टेंडर में कथित माफियागिरी को लेकर जनवरी 2026 में एलआईयू ने भी जांच की थी। करीब दो माह चली जांच में टेंडर और फर्म रजिस्ट्रेशन में अनियमितताओं के संकेत मिलने की बात सामने आई। रिपोर्ट में एसोसिएशन को कथित प्रेशर ग्रुप के तौर पर भी जांचा गया। एसआईटी की जांच में ठेकेदार गोविंद शर्मा, नीरज त्रिवेदी और प्रोफेसर राजेश शुक्ला उर्फ गुरुजी के नाम सामने आए हैं। राजेश शुक्ला की पत्नी प्रार्थना शुक्ला के नाम पंजीकृत कई फर्मों की भी जांच की जा रही है। दिल्ली के एक बड़े नेता के निजी सहायक का नाम सामने आने के बाद उसके संपर्कों की भी पड़ताल हो रही है। 

गोविंद शर्मा पर केडीए की ई-टेंडरिंग में कथित तकनीकी सेंधमारी के आरोप भी जांच के घेरे में हैं। आरोप है कि अंतिम बोली के दौरान सॉफ्टवेयर को होल्ड कराकर दूसरे ठेकेदारों को बोली से रोक दिया जाता था। जांच की आंच अब नगर निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों तक भी पहुंच गई है। 

चीफ इंजीनियर एसएफए जैदी समेत कई अधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायतों की एसआईटी पड़ताल कर रही है। आउटसोर्सिंग भर्ती से जुड़ी जेटीएन फर्म भी जांच के दायरे में है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय को कार्रवाई के बाद सुरक्षा दी गई है। वहीं छह एफआईआर के बाद गोविंद शर्मा फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि टेंडर के इस कथित सिंडिकेट की जड़ें आखिर कितनी गहरी हैं और इसकी पहुंच नगर निगम से बाहर तक कहां-कहां है।

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