ठेकों के खेल में कौन-कौन खिलाड़ी? 400 ठेकेदारों और अफसरों की होगी पड़ताल
125 करोड़ के ठेकों में गड़बड़ी के बाद बड़ा एक्शन अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में, पांच दिन में अंतरिम और 10 कार्य दिवस में देनी होगी अंतिम रिपोर्ट
(Today crime news)
उत्तर प्रदेश कानपुर। नगर निगम में ठेकों के खेल और कथित ठेकेदार सिंडिकेट की परतें अब जिला प्रशासन की जांच में खुलेंगी। 125 करोड़ रुपये के ठेकों में गड़बड़ी के मामले में शासन की सख्ती के बाद मंडलायुक्त के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी गई है। समिति केवल ठेकेदारों के दस्तावेज ही नहीं खंगालेगी, बल्कि टेंडर प्रक्रिया में अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका, काम की गुणवत्ता और ठेकों के बंटवारे तक की पड़ताल करेगी। समिति को पांच दिनों में अंतरिम रिपोर्ट और 10 कार्य दिवस में अंतिम रिपोर्ट सौंपनी होगी। जांच का दायरा बड़ा होने से नगर निगम में हड़कंप मचा है।
सीडीओ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति
मंडलायुक्त कार्यालय में हुई बैठक के बाद गठित समिति की कमान मुख्य विकास अधिकारी अनुभव जे. जैन को सौंपी गई है। उनके साथ लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता अनिल पांडेय को सदस्य बनाया गया है। समिति नगर निगम के पंजीकृत ठेकेदारों के रिकॉर्ड की पड़ताल करेगी और यह देखा जाएगा कि पंजीयन से लेकर टेंडर हासिल करने तक कहीं नियमों को दरकिनार तो नहीं किया गया।
27 हॉट मिक्स प्लांट और करीब 400 ठेकेदार रडार पर
जांच की सबसे अहम कड़ी नगर निगम में पंजीकृत 27 हॉट मिक्स प्लांट संचालकों समेत करीब 400 ठेकेदार होंगे। समिति वित्तीय वर्ष 2024-25 से अब तक ठेकेदारों को दिए गए कार्यों की फाइलें खंगालेगी। पंजीयन के दौरान लगाए गए दस्तावेज, तकनीकी और वित्तीय पात्रता, टेंडर प्रक्रिया, किसे काम मिला, किस दर पर मिला और मौके पर काम की वास्तविक गुणवत्ता क्या रही—इन सभी बिंदुओं की जांच की जाएगी।
किसके इशारे पर किसे मिला ठेका’, खुलेगा राज
जांच का सबसे संवेदनशील पहलू अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका है। समिति यह पता लगाएगी कि टेंडर प्रक्रिया में किसी अधिकारी या कर्मचारी ने किसी विशेष ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में कोई खेल तो नहीं किया। इसके साथ ही कथित सिंडिकेट में ठेकों के बंटवारे और रकम के लेनदेन से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल होगी। यदि दस्तावेजों और रिकॉर्ड से मिलीभगत के संकेत मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी तय की जा सकती है।
पांच फर्म ब्लैकलिस्ट, दो ठेकेदार गिरफ्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद नगर निगम स्तर पर भी कार्रवाई तेज हुई है। नगर निगम ने मामले में पांच फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया है। ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज कराए गए हैं और इनमें से दो ठेकेदारों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं, कथित सिंडिकेट का सरगना गोविंद शर्मा अभी फरार बताया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन की जांच में ठेका नेटवर्क से जुड़े दूसरे नाम सामने आने की भी संभावना जताई जा रही है।
नगर निगम के अफसरों पर भी उठे सवाल
मामले की निष्पक्ष जांच को लेकर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय पहले ही शासन को पत्र भेज चुके हैं। उन्होंने मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी की उपलब्धता का अनुरोध किया था, ताकि नगर निगम के मौजूदा अधिकारियों-कर्मचारियों के रहते जांच प्रभावित न हो। अब जिला प्रशासन की समिति ने ठेकेदारों के साथ-साथ निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी जांच के दायरे में लेकर साफ कर दिया है कि **ठेका प्रक्रिया में अगर कहीं मिलीभगत हुई है तो उसकी जिम्मेदारी केवल ठेकेदारों तक सीमित नहीं रहेगी। रक्षाबंधन के बाद सोमवार से जांच शुरू होने की संभावना है। अब निगाहें समिति की रिपोर्ट पर हैं, क्योंकि रिपोर्ट से यह साफ होगा कि नगर निगम के ठेकों में गड़बड़ी महज ठेकेदारों का खेल थी या फिर इसके पीछे अंदरखाने अधिकारियों कर्मचारियों की मिलीभगत से तैयार पूरा नेटवर्क काम कर रहा था।


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