NEET विवाद: CJP ने ठुकराया ‘मंत्रालय बदलने’ का प्रस्ताव, इस्तीफे पर अड़ी रही; अब परीक्षा कानून होगा और सख्त

NEET विवाद: CJP ने ठुकराया ‘मंत्रालय बदलने’ का प्रस्ताव, इस्तीफे पर अड़ी रही; अब परीक्षा कानून होगा और सख्त

(Today crime news)

नई दिल्ली।NEET पेपर लीक विवाद को लेकर चले लंबे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले केंद्र सरकार और आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की अहम बातचीत हुई। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, सरकार ने शुरुआती स्तर पर धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिमंडल से हटाने के बजाय उनका मंत्रालय बदलने का विकल्प रखा था, लेकिन CJP ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया।

सूत्रों के मुताबिक, CJP के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी मांग केवल एक है—धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। उनका कहना था कि NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मामले में केवल विभाग बदलना जवाबदेही तय नहीं करता और नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने के लिए मंत्री का पद छोड़ना आवश्यक है।

बताया जा रहा है कि 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ CJP प्रतिनिधिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बातचीत के दौरान सरकार की ओर से यह तर्क रखा गया कि किसी मंत्री का विभाग बदलना या उन्हें मंत्रिमंडल से हटाना पूरी तरह प्रधानमंत्री के विशेषाधिकार का विषय है। हालांकि, CJP ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार करते हुए अपनी मूल मांग दोहराई कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा।

सूत्रों का दावा है कि इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी और बातचीत आगे नहीं बढ़ी। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह भी चर्चा रही कि आंदोलन के शुरुआती चरण में ही उन्होंने इस्तीफे की इच्छा जताई थी, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

संसद में दिखी राजनीतिक एकजुटता

इस्तीफे के बाद 27 जुलाई को जब धर्मेंद्र प्रधान संसद परिसर पहुंचे तो भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। संसद के मकर द्वार पर बड़ी संख्या में सांसद मौजूद रहे। नेताओं ने उनका स्वागत करते हुए नारे लगाए और उनके समर्थन का सार्वजनिक प्रदर्शन किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके जरिए एनडीए ने यह संदेश देने की कोशिश की कि संकट की स्थिति में भी पार्टी अपने नेताओं के साथ मजबूती से खड़ी है।

इसी दौरान संसद परिसर में एक रोचक राजनीतिक क्षण भी देखने को मिला। कांग्रेस नेता जयराम रमेश, जिन्होंने एक दिन पहले तक धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी, उनसे मिले और सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा, होता है, राजनीति में यह सब चलता रहता है। इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, कुछ नहीं हुआ है भाई! मैं जमीनी स्तर का स्ट्रीट फाइटर हूं, कोई एसी कमरे में बैठने वाला नेता नहीं।

अब संसद में सख्त परीक्षा कानून पर नजर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच संसद में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पर चर्चा की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। सरकार का दावा है कि प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में धांधली पर पहले से कहीं अधिक कड़ा नियंत्रण स्थापित करना है।

प्रस्तावित संशोधनों में प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं

* पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों में अधिकतम सजा 5 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष करने का प्रस्ताव।

* दोषियों पर 50 लाख तक जुर्माना लगाने का प्रावधान।

* परीक्षा में अनियमितता और धोखाधड़ी के मामलों में और अधिक कठोर कानूनी कार्रवाई।

* पारदर्शी एवं सुरक्षित परीक्षा प्रणाली विकसित करने पर विशेष जोर।

NEET पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में उठे छात्र आंदोलन ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और जवाबदेही को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। अब सभी की नजर संसद में प्रस्तावित संशोधन विधेयक और सरकार द्वारा परीक्षा सुधारों को लागू करने की दिशा में उठाए जाने वाले अगले कदमों पर टिकी है।

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