कानपुर सेंट्रल पर वसूली गैंग पर GRP-RPF का शिकंजा, 9 किन्नर गिरफ्तार... लेकिन संरक्षण किसका?

कानपुर सेंट्रल पर वसूली गैंग पर GRP-RPF का शिकंजा, 9 किन्नर गिरफ्तार... लेकिन संरक्षण किसका? 

स्टेशन और ट्रेनों में बिना टिकट पहुंचने पर खड़े हुए गंभीर सवाल, आखिर किसके संरक्षण में चलता है यह पूरा खेल?

(Today crime news)

कानपुर। कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों से जबरन पैसे मांगने, विरोध करने पर गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार करने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद रविवार को जीआरपी और आरपीएफ ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए नौ किन्नरों को गिरफ्तार किया। प्लेटफॉर्म नंबर-10 पर हंगामे की सूचना मिलते ही दोनों सुरक्षा एजेंसियों की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने पहले सभी को समझाने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि वे पुलिसकर्मियों से भी उलझ गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए सभी आरोपितों को हिरासत में लेकर बीएनएसएस की धारा 170, 126 और 135 के तहत कार्रवाई की गई।

जीआरपी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी आरोपितों के खिलाफ यात्रियों से विवाद करने, जबरन पैसे मांगने और सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने के आरोप हैं। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया। सभी आरोपितों के नाम रिकॉर्ड में काल्पनिक रूप से दर्ज किए गए हैं। उनकी उम्र 19 से 22 वर्ष के बीच बताई गई है और वे कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, लखनऊ तथा कन्नौज के निवासी हैं।

यह कार्रवाई प्रभारी निरीक्षक जीआरपी कानपुर सेंट्रल ओम नारायण सिंह तथा प्रभारी निरीक्षक आरपीएफ पोस्ट कानपुर सेंट्रल सिद्धनाथ पाटीदार के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने की, जिसमें दोनों बलों के कई अधिकारी और जवान शामिल रहे।

कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल—आखिर स्टेशन और ट्रेनों तक पहुंच कैसे?

जीआरपी और आरपीएफ की कार्रवाई ने जितने सवाल आरोपितों पर खड़े किए हैं, उससे कहीं बड़े सवाल रेलवे की सुरक्षा और टिकट जांच व्यवस्था पर भी खड़े हो गए हैं।

कानपुर सेंट्रल जैसे हाई-सिक्योरिटी रेलवे स्टेशन पर जहां आम यात्री बिना प्लेटफॉर्म टिकट या वैध यात्रा टिकट के प्रवेश नहीं कर सकता, वहीं आखिर ऐसे लोग स्टेशन के प्लेटफॉर्मों और ट्रेनों तक कैसे पहुंच जाते हैं? यदि इनके पास न प्लेटफॉर्म टिकट होता है और न ही यात्रा टिकट, तो प्रवेश द्वारों पर तैनात सुरक्षा व्यवस्था और टिकट जांच तंत्र की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

क्या केवल कार्रवाई से खत्म होगी समस्या?

यात्रियों का कहना है कि स्टेशन और ट्रेनों में जबरन पैसे मांगना, विरोध करने पर अभद्रता करना और कई बार डराने-धमकाने जैसी घटनाएं नई नहीं हैं। लंबे समय से ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन समय-समय पर होने वाली कार्रवाई के बावजूद यह सिलसिला थमता नहीं दिखता। इससे यह सवाल भी उठता है कि आखिर ऐसी गतिविधियां दोबारा शुरू कैसे हो जाती हैं।

संरक्षण का खेल?

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रेलवे सूत्रों के अनुसार, स्टेशन परिसर में सक्रिय कुछ कथित वेंडरों के माध्यम से बाहरी लोगों के प्रवेश कराने की चर्चाएं लंबे समय से होती रही हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, यात्रियों के बीच यह भी चर्चा है कि यदि प्रवेश और निगरानी व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी हो तो बिना टिकट स्टेशन और ट्रेनों तक पहुंचना आसान नहीं होना चाहिए। ऐसे में यह आवश्यक है कि रेलवे प्रशासन पूरे तंत्र की निष्पक्ष जांच कराए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर भी कठोर कार्रवाई की जाए।

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सवाल जिनका जवाब रेलवे को देना होगा...

जब बिना टिकट प्रवेश प्रतिबंधित है तो ये लोग स्टेशन और ट्रेनों तक कैसे पहुंचते हैं?

 प्रवेश द्वारों पर तैनात टिकट जांच और सुरक्षा व्यवस्था आखिर क्या कर रही थी?

क्या केवल किन्नरों पर कार्रवाई पर्याप्त है या पूरे नेटवर्क की जांच भी होगी?

 यदि किसी कर्मचारी, ठेकेदार या अन्य रेलवे प्रसाशन की मिलीभगत है तो उस पर कार्रवाई कब होगी?

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