गोविंदपुरी स्टेशन पर अवैध वेंडरों का कब्जा, नियमों को ताक पर रख यात्रियों की सेहत से खिलवाड़

गोविंदपुरी स्टेशन पर अवैध वेंडरों का कब्जा, नियमों को ताक पर रख यात्रियों की सेहत से खिलवाड़

गोविंदपुरी स्टेशन पर अवैध वेंडरों का बोलबाला

प्रतिबंधित खाद्य सामग्री और महंगे पानी की खुलेआम बिक्री, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल


(Today crime news)

उत्तर प्रदेश कानपुर। गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन पर रेलवे प्रशासन की अनदेखी के चलते अवैध वेंडरों का नेटवर्क लगातार सक्रिय होता जा रहा है। स्टेशन परिसर और प्लेटफॉर्मों पर प्रतिबंधित खाद्य सामग्री, नकली पान मसाला, छिला खीरा तथा सस्ते ब्रांड का पानी खुलेआम बेचा जा रहा है। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए वेंडर बेखौफ होकर प्लेटफॉर्म से ट्रेनों की बोगियों तक पहुंच रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। बताते चलें कि प्लेटफार्म नंबर एक पर लोकमान तिलक गाड़ी आते ही अवैध वेंडर महिलाओं पुरुषों की टोली सक्रिय हो गई प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही महिलाओं और वेंडरों की टोली हाथों में मसालों की लड़ियां लेकर कोचों के पास पहुंच जाती है और यात्रियों को पान मसाला व अन्य सामग्री बेचने लगती है। जबकि रेलवे परिसर में पान मसाला और तंबाकू उत्पादों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। सूत्रों का दावा है कि प्लेटफॉर्मों पर बिकने वाले कई मसाले नकली भी हो सकते हैं, जिससे यात्रियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्टेशन पर रेलनीर के स्थान पर सस्ते और लोकल ब्रांड का पानी भी मनमाने दामों पर बेचा जा रहा है। जहां रेलनीर की निर्धारित कीमत 14 रुपये है, वहीं सामान्य पानी की बोतल यात्रियों को 20 रुपये में थमाई जा रही है। विरोध करने पर कुछ वेंडरों द्वारा अभद्र व्यवहार किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

मजबूरी में यात्रियों को अधिक कीमत देकर पानी खरीदना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, प्लेटफॉर्मों पर छिला खीरा, कटे फल और खुले में रखी खाद्य सामग्री की बिक्री भी धड़ल्ले से जारी है। रेलवे के खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत कटे, छिले अथवा अस्वच्छ खाद्य पदार्थों की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित है, बावजूद इसके नियमों का पालन नहीं कराया जा रहा। सबसे बड़ा सवाल स्टेशन परिसर और प्लेटफॉर्मों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है। करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए कैमरे अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। कैमरों की मौजूदगी के बावजूद वेंडरों का खुलेआम कारोबार जारी रहना रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यात्रियों का कहना है कि यदि जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो स्टेशन परिसर में अवैध कारोबार और यात्रियों की सुरक्षा व स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।

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