सपा में महाभंग की आहट? 25 सांसदों के टूटने के दावे से यूपी की राजनीति में भूचाल, अखिलेश ने किया पलटवार
(Today crime news)
उत्तर प्रदेश लखनऊ। महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) में हुई राजनीतिक उठापटक के बाद अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बड़े सियासी घटनाक्रम की चर्चाएं तेज हो गई हैं। डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के बयानों ने समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर संभावित टूट की अटकलों को हवा दे दी है। हालांकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इन सभी दावों को खारिज करते हुए पार्टी को पूरी तरह एकजुट बताया है।
BJP का दावा- सपा के 25-26 सांसद संपर्क में
डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया है कि समाजवादी पार्टी के करीब 25 से 26 सांसद पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं। उन्होंने कहा कि सपा परिवारवाद, आंतरिक असंतोष और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण कमजोर हो रही है और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में बड़ी टूट देखने को मिल सकती है।
मौर्य ने कहा कि भाजपा किसी को तोड़ने की राजनीति नहीं करती, लेकिन सपा के कई नेता स्वयं पार्टी छोड़ने के इच्छुक हैं।
राजभर का बड़ा आरोप, अमित शाह को पत्र भेजने की कही बात
उधर मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र सौंपा गया है, जिसमें कई नेताओं की भाजपा में शामिल होने की इच्छा जताई गई है। राजभर ने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों से जुड़े कथित मामलों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के डर से भी कई नेता राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
अखिलेश यादव का पलटवार
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इन आरोपों को भाजपा की राजनीतिक रणनीति बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले से ज्यादा मजबूत और संगठित है। अखिलेश ने कहा कि भाजपा का इतिहास दूसरी पार्टियों के नेताओं को लालच और दबाव के जरिए तोड़ने का रहा है, लेकिन समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और नेता वैचारिक रूप से मजबूत हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा के भीतर भी कई जनप्रतिनिधि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से असंतुष्ट हैं।
क्या कहता है लोकसभा का गणित?
लोकसभा चुनाव 2024 में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में शानदार प्रदर्शन करते हुए 37 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया था। वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दलों के खाते में 36 सीटें आई थीं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यदि सपा के दो-तिहाई सांसद यानी लगभग 25 सांसद किसी औपचारिक विलय प्रक्रिया के तहत दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं तो दलबदल कानून के प्रावधान अलग तरीके से लागू हो सकते हैं। हालांकि वर्तमान समय में ऐसी किसी प्रक्रिया या आधिकारिक घोषणा के कोई संकेत नहीं हैं।
आखिर क्यों उठ रही हैं टूट की चर्चाएं?
राजनीतिक गलियारों में सपा में संभावित असंतोष को लेकर कई कारण बताए जा रहे हैं—
- परिवारवाद को लेकर लगातार उठते सवाल।
- 2024 चुनाव के बाद संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर नाराजगी।
- पुराने मामलों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई की आशंकाएं।
- 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की राजनीतिक रणनीति।
- गैर-यादव पिछड़े और दलित वोट बैंक को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा।
2027 की जंग से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों ने अपनी रणनीतियां तेज कर दी हैं। एक ओर सपा PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत करने में जुटी है, वहीं भाजपा गैर-यादव पिछड़े वर्गों, दलितों और पारंपरिक समर्थक वर्गों को साधने की कोशिश कर रही है।


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