डीएम की बैठक से गायब रहे नगर निगम अधिशासी अभियंता पर गिरी गाज
1 करोड़ के कामों की समीक्षा छोड़ रहे नदारद, जिलाधिकारी ने थमाया कारण बताओ नोटिस
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उत्तर प्रदेश कानपुर। नगर निगम के करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक से गायब रहना अधिशासी अभियंता दिवाकर भास्कर को भारी पड़ गया। जिलाधिकारी कानपुर नगर ने मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए अधिशासी अभियंता दिवाकर भास्कर को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो दिन के भीतर जवाब तलब किया है। डीएम की इस कार्रवाई के बाद नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी कार्यालय से जारी पत्रांक 815/निकाय/2026-27 के अनुसार 18 मई 2026 को सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। बैठक की अध्यक्षता स्वयं जिलाधिकारी कर रहे थे, लेकिन पूर्व सूचना के बावजूद अधिशासी अभियंता दिवाकर भास्कर बैठक में उपस्थित नहीं हुए।
डीएम ने माना घोर लापरवाही
जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने नोटिस में स्पष्ट लिखा कि अधिशासी अभियंता की अनुपस्थिति के कारण निर्माण कार्यों की प्रभावी समीक्षा नहीं हो सकी। इसे शासकीय कार्यों के प्रति घोर लापरवाही माना गया है। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि डीएम ने बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल कर अधिकारियों को साफ संदेश दे दिया है कि अब मनमानी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
करोड़ों की परियोजनाओं पर पड़ा असर
सूत्रों के मुताबिक बैठक में शहर की कई महत्वपूर्ण निर्माण परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट पर चर्चा होनी थी। संबंधित अधिकारी की गैरमौजूदगी के कारण कई अहम बिंदुओं पर समीक्षा अधूरी रह गई। इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
दो दिन में जवाब, नहीं तो विभागीय कार्रवाई तय
डीएम ने अधिशासी अभियंता दिवाकर भास्कर को दो दिवस के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो विभागीय कार्रवाई, वेतन रोकने अथवा अन्य कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं।
अफसरशाही को प्रशासन का कड़ा संदेश
डीएम की इस कार्रवाई को नगर निगम के सुस्त और बेलगाम रवैये पर बड़ी प्रशासनिक चोट माना जा रहा है। लंबे समय से विकास कार्यों में लापरवाही और बैठकों में गैरजिम्मेदार रवैये की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में यह कार्रवाई अन्य अधिकारियों के लिए भी कड़ा संदेश मानी जा रही है कि अब सरकारी कामकाज में ढिलाई सीधे कार्रवाई का कारण बनेगी।


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