होली पर घर जाने की होड़, सेंट्रल स्टेशन पर बेकाबू भीड़, ट्रेनों में कैदखाने जैसे हालात

होली पर घर जाने की होड़, सेंट्रल स्टेशन पर बेकाबू भीड़, ट्रेनों में कैदखाने जैसे हालात

Today crime news 

उत्तर प्रदेश कानपुर। होली के मद्देनज़र घर लौटने की बेताबी ने कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर हालात बेकाबू कर दिए। दोपहर 12 बजे के बाद से देर रात तक ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची। स्टेशन पर आने-जाने वाली अधिकांश ट्रेनों में जनरल और स्लीपर कोच खचाखच भरे रहे। दोपहर जैसे ही 12506 कामाख्या–आनंद विहार एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म पर पहुंची, जनरल कोच में सवार यात्री स्लीपर कोच की ओर दौड़ पड़े। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि जनरल कोच के यात्रियों ने अंदर से दरवाजे बंद कर लिए। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने हस्तक्षेप कर दरवाजे खुलवाए, तब जाकर कुछ यात्री भीतर प्रवेश कर सके। अफरातफरी में कई युवक खिड़कियों के रास्ते कोच के अंदर घुसे, तो कुछ यात्री टॉयलेट कूपों में बैठकर सफर करने को मजबूर दिखे। इसी तरह नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस, कालका मेल, जोगबनी एक्सप्रेस और अजमेर–सियालदह एक्सप्रेस के डिब्बों के भीतर का दृश्य किसी कैदखाने से कम नहीं था। स्लीपर और जनरल कोच की ऊपरी सीटों पर यात्री लटके हुए सांस लेते नजर आए। कई यात्रियों ने बच्चों को चादर से बांधकर सीटों पर सुलाया, ताकि भीड़ में वे गिर न जाएं। एक बार कोच में घुसने के बाद बाहर निकलना भी जोखिम भरा लग रहा था। हालात ऐसे थे कि टॉयलेट तक जाने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा था। त्योहार पर घर पहुंचने की जिद और सीमित संसाधनों के बीच यात्रियों की मजबूरी साफ झलक रही थी। सवाल यह है कि हर वर्ष होली पर उमड़ने वाली इस भीड़ के बावजूद अतिरिक्त कोच और विशेष ट्रेनों की व्यवस्था पर्याप्त क्यों नहीं हो पाती? यात्रियों ने प्रशासन से बेहतर प्रबंधन और अतिरिक्त सेवाएं बढ़ाने की मांग की है, ताकि त्योहार की खुशियां सफर की दुश्वारियों में न बदलें।

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