नगर निगम में सत्ता का संग्राम: भाजपा पार्षदों का महापौर के खिलाफ खुला विद्रोह, बंटी मुक्त निगम’ की हुंकार

नगर निगम में सत्ता का संग्राम: भाजपा पार्षदों का महापौर के खिलाफ खुला विद्रोह, बंटी मुक्त निगम’ की हुंकार

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उत्तर प्रदेश कानपुर। नगर निगम कानपुर में सत्ताधारी भाजपा के भीतर ही गहरा असंतोष अब खुले टकराव में बदलता नजर आ रहा है। भाजपा के छह पार्षदों ने महापौर प्रमिला पांडेय के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए नगर निगम पर बाहरी नियंत्रण और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम का वास्तविक संचालन महापौर के बजाय उनके पुत्र बंटी उर्फ अमित पांडेय कर रहे हैं। विरोध कर रहे पार्षदों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह आंदोलन केवल छह पार्षदों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल्द ही 60 पार्षद उनके समर्थन में सामने आएंगे। पार्षदों ने ऐलान किया कि उनका एकमात्र लक्ष्य बंटी मुक्त नगर निगम बनाना है।

जनसमस्याएं उठाई तो निलंबन पार्षदों का आरोप

नगर निगम सदन के दौरान वार्ड-37 के पार्षद पवन गुप्ता और वार्ड-4 के पार्षद अंकित मौर्य को आगामी चार बैठकों के लिए निलंबित कर दिया गया। दोनों पार्षदों का कहना है कि उन्होंने केवल अपने वार्डों की मूलभूत समस्याओं—सफाई, सड़क, जल निकासी और विकास कार्यों—को प्रमुखता से उठाया था।पार्षदों का आरोप है कि महापौर के खिलाफ मुखर होने के कारण उनकी आवाज दबाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई, जबकि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे महापौर के पुत्र बंटी उर्फ अमित पांडेय की भूमिका रही।

चार और पार्षद समर्थन में, विरोध तेज

निलंबित पार्षदों के समर्थन में अब भाजपा के चार और पार्षद विकास जायसवाल, लक्ष्मी कोरी, आलोक पांडे और हरि स्वरूप तिवारी उर्फ निक्कू भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं। मंगलवार को सभी पार्षदों ने एकजुट होकर महापौर और उनके पुत्र पर नगर निगम के कार्यों में अनुचित हस्तक्षेप, अधिकारियों पर दबाव बनाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। वही पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक करेंगे। उनका कहना है कि नगर निगम की कार्यप्रणाली पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है और पारदर्शिता समाप्त हो गई है। विरोध कर रहे पार्षदों ने स्पष्ट किया है कि जब तक महापौर के पुत्र का नगर निगम कार्यालय में आना-जाना बंद नहीं होता और निगम के कामकाज में उनका हस्तक्षेप समाप्त नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन और आंदोलन जारी रहेगा।

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