सचिव और अध्यक्ष के विवाद से हुई सहकारी समिति में करोड़ों का घोटाला।
- आज कल सोशल मीडिया के प्लेटफार्म में चर्चित शहर की सांस्कृतिक गृह निर्माण सहकारी समिति में हुए करोडों का स्कला चर्चा का विषय बना हुआ है लेकिन यह घोटाला हुआ कैसे इस तथ्य को समझना जरूरी है सूत्रों के माने तो बिनगवां श्रेत्र स्थित इस समिति का गठन है। है। 1967 के लगभग हुआ था और लगभग 20 बीघा से बहुत जमीन राजस्व अभिलेखों में दर्ज है जिसमें समिति अपने सदस्यों को बड़े - बड़े प्लाट आवंटित किए गए थे लेकिन समिति के मूल सचिवों को उनकी जगह पर कब्ज़ा नहीं मिल पाया जब की उनकी जगह पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया है। कब्जा कर लिया है। अपने पैर पसार के लिए।इस समिति से सम्बन्ध रखने वाले एक जानकारी और अधिवक्ता की माने तो सांस्कृतिक गृह निर्माण सहकारी का विवाद काफी वर्षो तक कानपुर विकास प्राधिकरण से चला था उस समय समिति का सचिव भगवान दास दीक्षित और अध्यक्ष नानक चंद्र भाटिया थे लेकिन इन दोनों पदाधिकारियों ने समिति में पैरवी की। की। करना उचित नहीं समझा गया जिसके बाद समिति के एक सदस्य द्वारा माननीय उच्च न्यायालय तक समिति का
वर्ष 2014 के बाद से शुरू हुआ करोडों का स्कला।
लगभग बीस वर्षों के बाद हुए चुनाव की भनक किसी को नहीं लगी और समिति के मूल सदस्यों को हक़ समिति सचिव भगवान दास दीक्षित और नव निर्वाचित अध्यक्ष राकेश पांडेय हड़प रहे थे लेकिन इस बीच रुपयों के हस्तांतरण में मामला सही बैठने के कारण से दोंनो में था। । विवाद शुरू हो गया और समिति दो फाड़ में बट गयी जिसका फायदा एक उसही श्रेत्र के एक भूमाफिया ने जमकर उठाया उसमें समिति सचिव को अपने पक्ष में कर अपने घर वालों और अपने गांव वालों के नाम प्लाट आवंटित करवा कर दर्ज़नो प्लाटों के मालिक बन बैठा और समिति के अध्यक्ष राकेश पांडेय को जब समिति सचिव और भूमाफिया ने किनारे कर दिया तो अध्यक्ष राकेश पांडेय पुराने सदस्यों के घरों में जा रहे हैं अपनी जमीन और सदस्यों के हक़ में लड़ने के स्वरधन तो किया जो की एक दिखावट क्यों की मौजूदा स्थित में समिति के मूल व्यापारियों को उनकी जगह उपलब्ध नहीं करायी गयी और समिति की जमीन पर आज भी अवैध अवैध कब्ज़े करा बिक्री करने का खेल चल रहा है।


Post a Comment