श्रुति लखोटिया का वायरल वीडियो: पुरुषों को सिर्फ सेक्स से जोड़ने वाले बयान पर मचा बवाल, Gender Equality पर छिड़ी बहस

श्रुति लखोटिया का वायरल वीडियो: पुरुषों को सिर्फ सेक्स से जोड़ने वाले बयान पर मचा बवाल, Gender Equality पर छिड़ी बहस
(Today crime news)

Shruti Lakhotia Viral Video, सोशल मीडिया पर इन दिनों लाइफ और इंटिमेसी कोच श्रुति लखोटिया का एक पुराना इंटरव्यू सुर्खियों में है। Zee Switch के साथ हुए इंटरव्यू की एक क्लिप करीब एक महीने बाद अचानक वायरल हुई तो उनके कथित बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई। वीडियो के एक हिस्से में पुरुषों की जरूरतों को लेकर की गई टिप्पणी पर यूजर्स ने सवाल खड़े किए हैं। वायरल क्लिप को लेकर एक वर्ग ने इसे पुरुषों के प्रति सेक्सिस्ट और सामान्यीकृत टिप्पणी बताया है। वहीं कुछ यूजर्स का कहना है कि किसी भी बयान को कुछ सेकंड की वायरल क्लिप के आधार पर जज करने के बजाय पूरे इंटरव्यू और उसके संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

पुरुषों की जरूरत यानी सिर्फ सेक्स? यहीं से उठा विवाद

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही क्लिप में श्रुति लखोटिया कथित तौर पर पुरुषों की जरूरतों को सेक्स से जोड़ती नजर आती हैं। इसी हिस्से को लेकर सबसे ज्यादा प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आलोचकों का सवाल है कि क्या पूरे पुरुष वर्ग की भावनात्मक और मानसिक जरूरतों को नजरअंदाज करते हुए उन्हें केवल शारीरिक जरूरतों तक सीमित किया जा सकता है? यूजर्स का तर्क है कि पुरुष भी प्यार, भरोसा, सम्मान, भावनात्मक जुड़ाव, सुरक्षा और साथ की जरूरत महसूस करते हैं। ऐसे में किसी एक अनुभव या धारणा को पूरे जेंडर पर लागू करना जेंडर स्टीरियोटाइपिंग का रूप ले सकता है।

सवाल महिलाओं पर यही बात होती तो?

वायरल वीडियो ने बहस को एक और संवेदनशील सवाल तक पहुंचा दिया है। क्या जेंडर के आधार पर मानदंड बदल जाते हैं?
सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स पूछ रहे हैं कि यदि कोई पुरुष महिलाओं के बारे में इसी तरह का सामान्यीकृत बयान देता, तो क्या उसे भी समान स्तर की आलोचना का सामना करना पड़ता? इसी सवाल के बाद बहस महज श्रुति लखोटिया के कथित बयान तक सीमित नहीं रही, बल्कि Gender Equality और Double Standards तक पहुंच गई।
एक पक्ष का कहना है कि सेक्सिज्म को पुरुष या महिला के आधार पर अलग-अलग पैमाने से नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं दूसरा पक्ष इस बात पर जोर दे रहा है कि वायरल क्लिप को पूरे इंटरव्यू से अलग करके देखने से वक्ता के वास्तविक आशय की गलत व्याख्या भी हो सकती है।

 सेक्स और इंटिमेसी एक ही चीज नहीं

इस विवाद के बीच रिश्तों को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा भी सामने आई है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि सेक्स किसी रिश्ते का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इंटिमेसी सिर्फ सेक्स नहीं है।
किसी रिश्ते में भावनाओं को साझा करना, अपनी कमजोरियों और परेशानियों पर बात करना, भरोसा, सम्मान, संवाद और एक-दूसरे की सीमाओं को समझना भी इंटिमेसी का हिस्सा है। हर पुरुष और हर महिला की प्राथमिकताएं एक जैसी हों, यह जरूरी नहीं है। यही वजह है कि पूरे पुरुष वर्ग को केवल सेक्स की जरूरत वाला बताना उतना ही सामान्यीकरण हो सकता है, जितना महिलाओं के बारे में किसी एक धारणा को सार्वभौमिक सच मान लेना।

वायरल क्लिप ने खोल दी Gender Stereotyping की बहस

श्रुति लखोटिया की क्लिप को लेकर चल रही बहस का एक बड़ा हिस्सा इसी सवाल पर केंद्रित है कि क्या पुरुषों को हमेशा मजबूत, कम भावुक और मुख्य रूप से शारीरिक जरूरतों वाला मानना भी एक पुराने जेंडर स्टीरियोटाइप का हिस्सा है?

रिश्तों की वास्तविकता इससे कहीं ज्यादा जटिल है। किसी भी व्यक्ति की जरूरतें उसकी व्यक्तिगत सोच, अनुभव और रिश्ते की परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं। इसलिए पुरुषों और महिलाओं दोनों को एक तयशुदा खांचे में रखकर देखना विवाद को जन्म दे सकता है।

पूरी क्लिप देखे बिना राय बनाना कितना सही?

सोशल मीडिया की रफ्तार ने इस बहस को और तेज कर दिया है। इंटरव्यू के कुछ सेकंड का हिस्सा काटकर वायरल होना अब आम बात है। ऐसे में किसी बयान को उसके मूल संदर्भ से अलग देखने पर अर्थ बदलने की संभावना रहती है। इसलिए वायरल क्लिप के आधार पर किसी व्यक्ति की पूरी सोच या व्यक्तित्व पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले पूरे इंटरव्यू का संदर्भ देखना जरूरी है।

फिलहाल श्रुति लखोटिया की वायरल क्लिप ने एक पुराने सवाल को फिर सामने ला दिया है। क्या जेंडर इक्वालिटी का मतलब दोनों जेंडर के लिए समान पैमाना और समान सम्मान भी है?

रिश्तों में सेक्स की अपनी भूमिका हो सकती है, लेकिन प्यार, भरोसा, सम्मान, संवाद और भावनात्मक जुड़ाव को नजरअंदाज करके किसी भी जेंडर की जरूरतों को एक ही शब्द में समेट देना रिश्तों की वास्तविक तस्वीर को छोटा कर देता है। वायरल वीडियो पर बहस जारी है, लेकिन इससे निकला बड़ा सवाल यही है। किसी व्यक्ति को उसके जेंडर से नहीं, उसकी व्यक्तिगत जरूरतों और पसंदों के संदर्भ में देखना कितना जरूरी है?

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