मोदी का बाप भी जाएगा, बयान पर सियासी संग्राम, खड़गे के निशाने पर बीजेपी, कांग्रेस के बचाव से बढ़ा विवाद
बीजेपी ने मांगी माफी, कांग्रेस बोली—‘बाप’ से आशय RSS की विचारधारा से; अमित शाह ने भी खोला मोर्चा, जुबानी जंग में महुआ मोइत्रा की एंट्री
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नई दिल्ली/पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की विवादित टिप्पणी ने देश की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। बिहार की राजधानी पटना में डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के कार्यक्रम में दिया गया बयान अब बीजेपी और कांग्रेस के बीच तीखे टकराव की वजह बन गया है। बीजेपी ने इसे प्रधानमंत्री के प्रति अमर्यादित भाषा करार देते हुए कांग्रेस से माफी की मांग की है, जबकि कांग्रेस ने बयान का बचाव करते हुए उसके संदर्भ को RSS की विचारधारा से जोड़ दिया है। इस विवाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की प्रतिक्रिया ने भी सियासी तापमान बढ़ा दिया है।
खड़गे के एक बयान से गरमाई सियासत
विवाद की शुरुआत रविवार, 25 अक्टूबर को पटना में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी की विचारधारा पर निशाना साध रहे थे। इसी बीच, कार्यक्रम में मौजूद एक व्यक्ति की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि मोदी कहीं नहीं जाएंगे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए खड़गे ने कहा, मोदी का बाप भी जाएगा।
इस टिप्पणी के सामने आते ही राजनीतिक विवाद भड़क उठा। बीजेपी ने इसे प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया। वहीं, कांग्रेस ने बयान को उसके संदर्भ में समझने की दलील दी। सवाल यह है कि क्या राजनीतिक विरोध अब नीतियों और विचारधाराओं की बहस से निकलकर व्यक्तिगत कटाक्षों तक सिमटता जा रहा है?
बीजेपी का पलटवार, कांग्रेस से मांगा जवाब
सोमवार, 26 अक्टूबर को बीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस पर पलटवार किया। पार्टी ने लिखा, ‘माफ करना, भारत-विरोधी ताकतों, लेकिन मोदी कहीं नहीं जाएंगे।’ बीजेपी ने इस संदेश के जरिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर सवाल उठाने वाले विपक्षी बयानों को निशाने पर लिया।
बीजेपी नेताओं ने खड़गे से उनकी टिप्पणी के लिए माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री और उनके परिवार को लेकर बार-बार आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। बीजेपी ने इस विवाद को केवल एक बयान तक सीमित रखने के बजाय कांग्रेस की राजनीतिक भाषा और कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं।
अमित शाह ने भी साधा निशाना
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी खड़गे की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार को लेकर बार-बार मर्यादा की सीमाएं लांघती है।
शाह ने अपने राजनीतिक हमले में प्रधानमंत्री की मां को लेकर पहले हुई टिप्पणियों, मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कहे जाने और उनके चाय बेचने की पृष्ठभूमि पर किए गए तंज जैसे पुराने विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक संवाद का स्तर गिराने का आरोप लगाया।
बीजेपी का कहना है कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विरोध के नाम पर व्यक्तिगत टिप्पणियों को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
कांग्रेस का बचाव—बाप से आशय RSS से था
बीजेपी के हमले के बीच कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने खड़गे के बयान का बचाव किया। समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि बीजेपी को पहले उत्तराखंड में ‘शुद्धिकरण’ से जुड़े विवाद पर माफी मांगनी चाहिए।
खेड़ा के मुताबिक, खड़गे ने ‘बाप’ शब्द का इस्तेमाल प्रधानमंत्री के जैविक पिता के संदर्भ में नहीं, बल्कि RSS को वैचारिक अभिभावक संगठन के रूप में इंगित करने के लिए किया था। कांग्रेस ने इसी व्याख्या के आधार पर बीजेपी के आरोपों को चुनौती दी।
हालांकि, बयान की मंशा को लेकर दोनों दलों के दावे अलग-अलग हैं। बीजेपी इसे प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक टिप्पणी मान रही है, जबकि कांग्रेस इसे वैचारिक विरोध के संदर्भ में पेश कर रही है।
महुआ मोइत्रा की टिप्पणी से भी बढ़ी तकरार
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सोमवार को सोशल मीडिया पर इस विवाद से जुड़ी प्रतिक्रिया दी। उनकी पोस्ट में ‘मोदी आएंगे’ और ‘जाएगा तो उसका बाप भी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इससे बीजेपी और विपक्ष के बीच जारी बयानबाजी को और हवा मिली।
SIR और हिंसा को लेकर बीजेपी के सवाल
बीजेपी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए एक नवंबर को होने वाले संभावित विरोध को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी ने दिल्ली में हिंसा और आगजनी की आशंका जताते हुए फ्रांस, बांग्लादेश और नेपाल की घटनाओं से तुलना की तथा सत्ता परिवर्तन के कथित प्रयासों को लेकर आरोप लगाए।
हालांकि, ये बीजेपी की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप और आशंकाएं हैं। इन्हें किसी संभावित हिंसा, आगजनी या सत्ता परिवर्तन की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मुद्दा बयान से आगे, सियासत में मर्यादा की परीक्षा
खड़गे की टिप्पणी पर शुरू हुआ विवाद एक बार फिर राजनीतिक संवाद की भाषा को बहस के केंद्र में ले आया है। बीजेपी माफी की मांग पर अड़ी है, जबकि कांग्रेस बयान की अपनी व्याख्या के सहारे उसका बचाव कर रही है।
लोकतंत्र में सत्ता पक्ष की आलोचना और विपक्ष का विरोध दोनों जरूरी हैं, लेकिन जब बहस नीतियों, रोजगार, महंगाई और जनहित के सवालों से हटकर व्यक्तिगत कटाक्षों पर टिक जाती है, तो असली मुद्दे पीछे छूटने लगते हैं। फिलहाल, खड़गे के बयान पर माफी की मांग और कांग्रेस के बचाव के बीच सियासी घमासान जारी है। अब देखना होगा कि दोनों दल इस विवाद को राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखते हैं या यह टकराव आने वाले दिनों में और तीखा होता है।


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