महाकुंभ वाली मोनालिसा फिर चर्चा में, उम्र विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
हाईकोर्ट ने मोनालिसा को नाबालिग घोषित करने वाले नगर पालिका के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि उम्र संबंधी निर्णय से पहले संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी है।
(Today crime news)
इंदौर। महाकुंभ से सोशल मीडिया पर वायरल होकर देशभर में पहचान बनाने वाली मोनालिसा भोंसले एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला उनकी उम्र और जन्मतिथि से जुड़े विवाद का है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने मोनालिसा को नाबालिग घोषित करने वाले महेश्वर नगर पालिका के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की उम्र को लेकर फैसला करने से पहले संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना जरूरी है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने मोनालिसा की वास्तविक जन्मतिथि क्या है, इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अदालत ने संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया है कि मोनालिसा को सुनवाई का अवसर देने के बाद उनके पिता की ओर से दिए गए आवेदन पर कानून के अनुसार नए सिरे से निर्णय लिया जाए।
कैसे शुरू हुआ उम्र का विवाद?
मोनालिसा की जन्मतिथि को लेकर विवाद उस समय सामने आया, जब महेश्वर के मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने 31 मार्च 2026 को एक आदेश जारी किया। इसमें नगर पालिका के रिकॉर्ड में दर्ज उनकी जन्मतिथि में बदलाव करते हुए उन्हें नाबालिग माना गया था।
बताया गया कि पुराने रिकॉर्ड में मोनालिसा की जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज थी, जबकि बाद में इसे बदलकर 30 दिसंबर 2009 किए जाने की बात सामने आई। इसी बदलाव के बाद उम्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ और मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
पुराने दस्तावेजों का भी दिया गया हवाला
मोनालिसा की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनकी उम्र से संबंधित पुराने आधिकारिक दस्तावेजों में लगातार 1 जनवरी 2008 जन्मतिथि दर्ज रही है। सुनवाई के दौरान बताया गया कि मई 2015 में जारी आधार कार्ड में भी यही जन्मतिथि दर्ज थी। इसके अलावा पैन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र में भी इसी जन्मतिथि का उल्लेख होने की बात अदालत के सामने रखी गई।
मोनालिसा की मां की ओर से मई 2025 में दिए गए हलफनामे में भी 1 जनवरी 2008 की जन्मतिथि दर्ज होने की दलील पेश की गई।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई जस्टिस गजेंद्र सिंह की पीठ में हुई। अदालत ने नगर पालिका अधिकारी के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके आधार पर मोनालिसा को नाबालिग माना गया था।
कोर्ट का जोर इस बात पर रहा कि किसी व्यक्ति की उम्र के संबंध में एकतरफा फैसला नहीं किया जा सकता। संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने मामले को संबंधित अधिकारी के पास वापस भेजते हुए मोनालिसा को सुनवाई का अवसर देने और उनके पिता के आवेदन पर नए सिरे से फैसला करने का निर्देश दिया।
जन्मतिथि पर अभी अंतिम फैसला नहीं
हाईकोर्ट के आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत ने 1 जनवरी 2008 या 30 दिसंबर 2009 में से किसी जन्मतिथि को अंतिम रूप से सही नहीं माना है। यानी फिलहाल अदालत ने मोनालिसा की वास्तविक जन्मतिथि निर्धारित नहीं की है।
अब संबंधित अधिकारी को पहले मोनालिसा का पक्ष सुनना होगा और उपलब्ध दस्तावेजों तथा उनके पिता की ओर से दिए गए आवेदन पर कानून के मुताबिक दोबारा निर्णय लेना होगा। इसके बाद ही जन्मतिथि को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पिता की भूमिका पर भी हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान मोनालिसा के परिवार और उनकी शादी से जुड़े घटनाक्रम पर भी चर्चा हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत में उम्र को लेकर उनके पिता की ओर से उठाए गए मामले के संदर्भ में भी सवाल हुए। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश का मुख्य आधार मोनालिसा को सुनवाई का अवसर दिए बिना उम्र संबंधी आदेश पारित किए जाने की प्रक्रिया है।
मोनालिसा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा पेश हुए और पुराने आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज जन्मतिथि का हवाला दिया।
शादी और पति से जुड़े मामलों पर सीधा असर नहीं
हाईकोर्ट के इस आदेश को मोनालिसा की शादी या उनके पति के खिलाफ दर्ज मामलों पर सीधे तौर पर लागू नहीं माना जा सकता। अदालत ने फिलहाल केवल नगर पालिका के उस आदेश को रद्द किया है, जिसमें उन्हें नाबालिग घोषित किया गया था।
महाकुंभ के दौरान वायरल हुईं मोनालिसा पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में रही हैं। अब उनकी उम्र और जन्मतिथि से जुड़े कानूनी विवाद में हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक बार फिर उनका नाम सुर्खियों में है। हालांकि उनकी जन्मतिथि को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित अधिकारी की नए सिरे से होने वाली सुनवाई और निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।


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