उच्च शिक्षा में AI की दस्तक: पढ़ाई से मूल्यांकन तक बदलेगा शिक्षण का तरीका, IIT कानपुर में मंथन
IIT कानपुर, BHU और CSJMU के शिक्षकों ने साझा किए अनुभव; एआई के जिम्मेदार इस्तेमाल और नैतिक चुनौतियों पर हुई चर्चा
(Today crime news)
उत्तर प्रदेश कानपुर। उच्च शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का बढ़ता प्रभाव अब शिक्षण पद्धतियों से लेकर विद्यार्थियों के मूल्यांकन तक बदलाव की संभावनाएं पैदा कर रहा है। इसी को लेकर आईआईटी कानपुर में शिक्षकों की कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें एआई के प्रभावी, व्यवस्थित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर विस्तार से मंथन हुआ। आईआईटी कानपुर के सेंटर फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड टीचिंग एक्सीलेंस (CERTEx) की ओर से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में तीनों संस्थानों के शिक्षकों ने भाग लिया।
कार्यशाला का शुभारंभ आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल, बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी, सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय पाठक और CERTEx के प्रभारी प्रो. मनोज के. हरबोला के संबोधन से हुआ। इस दौरान उच्च शिक्षा में एआई की उपयोगिता, कक्षाओं में इसके व्यावहारिक इस्तेमाल और विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में इसकी भूमिका पर विचार साझा किए गए।
कक्षा से मूल्यांकन तक AI की भूमिका पर चर्चा
कार्यशाला में शिक्षकों ने चर्चा की कि एआई आधारित तकनीकों का इस्तेमाल किस तरह शिक्षण को अधिक प्रभावी, संवादपरक और विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुरूप बनाने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही विद्यार्थियों की भागीदारी, सीखने की क्षमता के आकलन और पारंपरिक मूल्यांकन पद्धतियों में संभावित बदलावों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
प्रतिभागियों ने एआई के इस्तेमाल से जुड़ी नैतिक चुनौतियों, शैक्षणिक जिम्मेदारियों और तकनीक के संतुलित उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। चर्चा में यह पहलू भी प्रमुख रहा कि एआई को शिक्षकों की भूमिका के विकल्प के बजाय शिक्षण प्रक्रिया को बेहतर बनाने वाले साधन के रूप में किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
ओपन-माइक सत्रों और पैनल चर्चा में सामने आए अनुभव
कार्यशाला के दौरान आयोजित दो ओपन-माइक सत्रों में शिक्षकों ने एआई के शैक्षणिक उपयोग से जुड़े अपने अनुभव, व्यावहारिक चुनौतियां और संभावनाएं साझा कीं। इसके अलावा एक घंटे की पैनल चर्चा में विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने उच्च शिक्षा में एआई के बढ़ते इस्तेमाल तथा उससे जुड़ी जिम्मेदारियों पर अपने विचार रखे।
विभिन्न विषयों के शिक्षकों की भागीदारी से यह समझने का अवसर मिला कि अलग-अलग शैक्षणिक क्षेत्रों में एआई का उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है। चर्चा में तकनीक के लाभों के साथ उसकी सीमाओं और जिम्मेदार इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
शिक्षकों के बीच सहयोग और संवाद पर जोर
वक्ताओं और प्रतिभागियों ने कहा कि उच्च शिक्षा में एआई का प्रभावी और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों, विशेषज्ञों और शिक्षण संस्थानों के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है। तकनीक के तेजी से बदलते स्वरूप को देखते हुए शिक्षकों के अनुभव साझा करने और नई शिक्षण पद्धतियों को समझने के लिए साझा मंचों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई।
कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसा मंच उपलब्ध कराना था, जहां वे एआई आधारित तकनीकों के इस्तेमाल पर चर्चा कर सकें और पढ़ाने, सीखने तथा विद्यार्थियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उपाय तलाश सकें। आईआईटी कानपुर, बीएचयू और सीएसजेएमयू की संयुक्त भागीदारी ने उच्च शिक्षा में एआई के जिम्मेदार उपयोग को लेकर अंतर-संस्थागत सहयोग की अहमियत को रेखांकित किया।



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