नरवल तहसील में समाधान दिवस: 186 शिकायतों पर हुई सुनवाई, 11 का मौके पर निस्तारण; डीएम ने अफसरों को दिए सख्त निर्देश

नरवल तहसील में समाधान दिवस: 186 शिकायतों पर हुई सुनवाई, 11 का मौके पर निस्तारण, डीएम ने अफसरों को दिए सख्त निर्देश

नामांतरण से लेकर खतौनी और दिव्यांग प्रमाण पत्र तक मामलों का मौके पर समाधान, राजस्व की सबसे ज्यादा 85 शिकायतें पहुंचीं; डीएम बोले- स्थलीय जांच के साथ हो गुणवत्तापूर्ण निस्तारण

(Today crime news)

उत्तर प्रदेश कानपुर। नरवल तहसील में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में फरियादियों की भीड़ उमड़ी। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विभागों से जुड़ी 186 शिकायतें और प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। अधिकारियों ने सुनवाई के दौरान 11 मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर फरियादियों को तत्काल राहत दी। समाधान दिवस में लंबे समय से लंबित राजस्व मामलों का भी समाधान कराया गया। किदवई नगर निवासी सुशीला चौरसिया और राजामार्केट निवासी पूजा शर्मा के नामांतरण आदेश का अमलदरामद कर खतौनी उपलब्ध कराई गई। वहीं बगाही निवासी किरनपाल और शाहपुर निवासी कोकिला की जमीन बंधक मुक्त होने के बावजूद खतौनी में दर्ज नहीं थी। दोनों मामलों में मौके पर कार्रवाई कर अभिलेख दुरुस्त किए गए। बर्रा निवासी रंजीत की खतौनी में दर्ज गलत नाम को संशोधित किया गया। वहीं बरईगढ़ निवासी रमेश कुमार सिंह का अंश निर्धारण कर उन्हें खतौनी उपलब्ध कराई गई।


दिव्यांग शिविर में भी मिली तत्काल राहत

समाधान दिवस के साथ लगाए गए विशेष दिव्यांग शिविर में भी फरियादियों को मौके पर राहत मिली। सेमरझाल निवासी रमेशचन्द्र धोबी और मडिलवां निवासी श्यामकली की मेडिकल बोर्ड से जांच कर दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए गए। दलपतपुर निवासी स्वेता उत्तम को जाति प्रमाण पत्र भी मौके पर उपलब्ध कराया गया।

बारिश में मकान गिरने के मामले में हरीपुर मजरा गुगुरा निवासी अटल बिहारी की जांच कर सहायता के लिए रिपोर्ट भेजी गई। वहीं राम सिंह को बताया गया कि दैवीय आपदा के तहत मिलने वाली सहायता राशि पहले ही उनके खाते में भेजी जा चुकी है।

राजस्व से जुड़ी सबसे ज्यादा शिकायतें

समाधान दिवस में प्राप्त शिकायतों में 85 राजस्व, 47 विकास, 15 राजस्व-पुलिस, 12 पुलिस, आठ बिजली और चार पीडब्ल्यूडी से संबंधित रहीं। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित शिकायतों का निस्तारण महज औपचारिकता न बने। आवश्यकतानुसार स्थलीय जांच कर समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उन्हें वास्तविक राहत दिलाने के निर्देश दिए।

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