650 करोड़ के 275 टेंडरों की जांच, बंटी टैक्स से सिंडीकेट तक के आरोपों में घिरा नगर निगम

650 करोड़ के 275 टेंडरों की जांच, बंटी टैक्स से सिंडीकेट तक के आरोपों में घिरा नगर निगम

सीएम योगी की सख्ती के बाद नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने खोली चार साल की फाइलें, ठेकेदारों और पार्षदों के गंभीर आरोपों से बढ़ी जांच की धार

(Today crime news)

उत्तर प्रदेश कानपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद कानपुर नगर निगम में बीते चार वर्षों के करीब 650 करोड़ रुपये के 275 टेंडरों की जांच शुरू हो गई है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के निर्देश पर सभी छह जोन और नगर निगम मुख्यालय में पुरानी टेंडर फाइलें खंगाली जा रही हैं। जांच का दायरा केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि 15वें वित्त आयोग से कराए गए कार्यों के भौतिक सत्यापन की भी तैयारी है। जांच के बीच ठेकेदारों और भाजपा पार्षदों ने नगर निगम की टेंडर व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि ये आरोप जांच के दायरे में हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। नगर आयुक्त के कैंप कार्यालय में मुख्य अभियंता सैय्यद फरीद अख्तर जैदी समेत अभियंताओं और अधिकारियों के साथ टेंडर फाइलों की गहन पड़ताल की जा रही है। सोमवार देर रात तक जांच चली और मंगलवार को भी दस्तावेजों की छानबीन जारी रही। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने कहा कि जांच जारी है। रिपोर्ट आने के बाद टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जांच रिपोर्ट शासन को भी भेजी जाएगी।

 एक ही फर्म को बड़े ठेके क्यों? जांच के घेरे में पूरा सिस्टम

जांच में यह देखा जा रहा है कि आखिर किन बड़ी फर्मों को लगातार करोड़ों के ठेके मिलते रहे, ठेकेदारी के लिए गठित समितियों ने किन मानकों के आधार पर फर्मों का पंजीकरण किया और क्या पात्रता नियमों की अनदेखी हुई। इसके अलावा यह भी जांचा जा रहा है कि 15 प्रतिशत तक बिलो टेंडर देने वाली फर्मों को किन कारणों से बाहर किया गया, जबकि मामूली .05 से एक प्रतिशत बिलो दर वाली फर्मों को ठेके कैसे मिले। एक बड़ा सवाल टेंडर की ऑनलाइन प्रक्रिया को लेकर भी उठाया गया है। आरोप है कि कुछ बड़े टेंडर वेबसाइट पर निर्धारित समय से काफी देर से दिखाई देते थे, जिससे अन्य ठेकेदारों को भाग लेने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता था। जांच में अब चार वर्षों का पूरा रिकॉर्ड खंगालकर यह पता लगाया जाएगा कि किस कंपनी को कितने करोड़ के ठेके मिले और कहीं एक ही समूह का दबदबा तो नहीं रहा।

 ठेकेदारों का आरोप- सिस्टम से चलता था खेल

ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए कथित तौर पर पूरा तंत्र काम करता था। उनका कहना है कि बड़े टेंडरों की जानकारी समय पर सार्वजनिक न होने से आम ठेकेदार प्रतिस्पर्धा से बाहर रह जाते थे और इसका फायदा कथित रूप से एक सीमित समूह को मिलता था। कुछ ठेकेदारों ने फर्मों के पंजीकरण, पात्रता और कमीशनखोरी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई मामलों में कम दर देने वाली फर्मों की बजाय अधिक दर पर काम लेने वालों को प्राथमिकता मिली, जिससे नगर निगम के राजस्व हितों पर भी सवाल खड़े होते हैं।

बंटी टैक्स के आरोप से गरमाई राजनीति

भाजपा पार्षदों ने भी नगर निगम की टेंडर व्यवस्था को लेकर तीखे आरोप लगाए हैं। पार्षद पवन गुप्ता ने मुख्यमंत्री द्वारा कथित माफिया टैक्स के मुद्दे का जिक्र करते हुए इसे बंटी टैक्स तक करार दिया। वहीं पार्षद लक्ष्मी कोरी ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर एक विशेष सिंडीकेट का प्रभाव रहा और इस मामले की निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आ सकती है। पार्षदों ने महापौर के बेटे और कुछ ठेकेदारों के कथित प्रभाव को लेकर भी आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी जिम्मेदारी

अब निगाहें नगर आयुक्त की जांच पर टिकी हैं। 650 करोड़ रुपये और 275 टेंडरों की पड़ताल में यदि नियमों की अनदेखी, पक्षपात, फर्जी पंजीकरण, मिलीभगत या वित्तीय अनियमितता के ठोस प्रमाण मिलते हैं तो नगर निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित ठेकेदारों पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

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