मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद में किसकी एंट्री-किसकी एग्जिट? किन चेहरों पर बनेगी बात? 12 पद खाली, लंबी तैयारी!

मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद में किसकी एंट्री-किसकी एग्जिट? किन चेहरों पर बनेगी बात? 12 पद खाली, लंबी तैयारी! 

 संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज 

(Today crime news)

भारतीय जनता पार्टी (BJP) । नई राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद अब मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार में खाली पदों को भरने के साथ-साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है। 2029 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनाव इस फेरबदल में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

मौजूदा समय में प्रधानमंत्री समेत केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 69 सदस्य हैं। संविधान के अनुच्छेद 75(1ए) के तहत मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत तक हो सकती है, यानी 81 सदस्य। इस हिसाब से फिलहाल 12 पदों की गुंजाइश है। हालांकि, इन 12 पदों को भरना ही संभावित फेरबदल का एकमात्र मकसद नहीं माना जा रहा। कई मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालय हैं और जिम्मेदारियों का दोबारा विभाजन भी इस बदलाव का हिस्सा हो सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि किन चेहरों की सत्ता में एंट्री?

संगठन में जिम्मेदारी मिली तो सरकार से विदाई संभव, किन मंत्रियों के जाने की चर्चा?

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित फेरबदल में उन मंत्रियों पर खास नजर है, जिन्हें हाल में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम में नई जिम्मेदारियां मिली हैं। बीजेपी की परंपरा 'एक व्यक्ति, एक पद' की रही है, इसलिए पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका पाने वाले कुछ मंत्रियों को सरकार की जिम्मेदारी से हटाया जा सकता है। दिल्ली बीजेपी की कमान हर्ष मल्होत्रा और उत्तर प्रदेश बीजेपी की जिम्मेदारी पंकज चौधरी को मिलने के बाद इनके मंत्री पद को लेकर भी चर्चा है।

इसी तरह केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बीजेपी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में उनके सरकार और संगठन के दोनों पदों को लेकर भी अटकलें हैं। पार्टी संगठन में जिम्मेदारी पाने वाले नेताओं की सूची यहीं खत्म नहीं होती। स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े, सतीश पूनिया और तरुण चुघ जैसे नेताओं को भी संगठनात्मक भूमिकाओं में महत्व मिला है। ऐसे में आने वाले मंत्रिमंडलीय बदलाव में सरकार और संगठन के बीच जिम्मेदारियों के फेरबदल पर नजर रहेगी। हालांकि, बीजेपी ने संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

किन मंत्रियों के पद छोड़ने की चर्चा?

राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने वाले मंत्रियों पर भी नजर है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में खत्म होना है। ऐसे में उनके भविष्य को लेकर भी फैसला संभावित फेरबदल से जुड़ सकता है। वहीं, धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्रालय से हटने और राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने के बाद जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू के मंत्री पद छोड़ने से पहले ही मंत्रिपरिषद में बदलाव की शुरुआत हो चुकी है।

उम्र भी बनेगी बड़ा फैक्टर

मोदी 3.0 में संभावित फेरबदल का एक बड़ा फैक्टर मंत्रियों की उम्र भी हो सकती है। 2024 में सरकार के गठन के समय बड़ी संख्या में मंत्री 51 से 70 वर्ष के आयु वर्ग में थे। अब मंत्रिपरिषद में 70 वर्ष से अधिक उम्र के कई मंत्री हैं। बिहार के सहयोगी दल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी, 81 वर्ष की उम्र में, मंत्रिमंडल के सबसे वरिष्ठ सदस्यों में हैं। इसके उलट तेलुगु देशम पार्टी के 38 वर्षीय के. राम मोहन नायडू मोदी सरकार के सबसे युवा मंत्रियों में हैं।

सूत्रों के मुताबिक, नए फेरबदल में युवा चेहरों और महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना है। यह बदलाव बीजेपी की आने वाले चुनावों के लिए नई पीढ़ी तैयार करने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। इसका मकसद केवल पीढ़ीगत बदलाव नहीं, बल्कि 2029 के चुनाव के लिए भाजपा की राजनीतिक टीम को अधिक सक्रिय और चुनावी दृष्टि से उपयोगी बनाना भी हो सकता है।

यूपी से लेकर पंजाब तक चुनावी समीकरण

संभावित फेरबदल में राज्यों के चुनावी समीकरण भी अहम हैं। 2027 में उत्तर प्रदेश (403 सीटें), पंजाब (117 सीटें), हिमाचल प्रदेश (68 सीटें), गुजरात(182 सीटें), उत्तराखंड (70 सीटें), गोवा (40 सीटें) और मणिपुर (60 सीटें) में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इन राज्यों से नए चेहरों को केंद्र में प्रतिनिधित्व देने की संभावना पर चर्चा हो रही है। उत्तर प्रदेश, बीजेपी के लिए खास तौर पर अहम है। वहीं, गुजरात की बात करें तो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य है। पंजाब में भी बीजेपी अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है। मध्य प्रदेश (230 सीटें), राजस्थान (200 सीटें), महाराष्ट्र (288 सीटें), कर्नाटक (224 सीटें) और हिमाचल प्रदेश से भी संभावित नामों पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।

महाराष्ट्र से श्रीकांत शिंदे का नाम चर्चा में

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सांसदों की संख्या बढ़ने के बाद सहयोगी दल को केंद्र में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना पर नजर है। सूत्रों के मुताबिक, एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे का नाम संभावित केंद्रीय मंत्री के तौर पर चर्चा में है। हालांकि, यह अभी केवल राजनीतिक अटकल है और अंतिम फैसला नेतृत्व को करना है।

पंजाब में AAP से आए सांसदों पर नजर, किन-किन के नाम?

पंजाब का समीकरण भी इस संभावित फेरबदल में महत्वपूर्ण हो सकता है। आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आए राज्यसभा सांसदों के समूह को केंद्र में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना पर चर्चा है। इनमें संदीप पाठक को पहले ही पार्टी संगठन में सचिव की जिम्मेदारी दी जा चुकी है। ऐसे में पंजाब से किसी नए चेहरे को केंद्र सरकार में जगह देने का फैसला चुनावी रणनीति से भी जुड़ा हो सकता है। पंजाब में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित राजनीतिक समीकरण को लेकर भी चर्चा चल रही है। हरसिमरत कौर बादल पहले मोदी सरकार में मंत्री रह चुकी हैं और 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर उन्होंने इस्तीफा दिया था।

क्या नए सहयोगी दलों को मिलेगी जगह?

मोदी सरकार के अगले फेरबदल में एनडीए के सहयोगी दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। महाराष्ट्र में शिवसेना, पंजाब में संभावित अकाली दल समीकरण और दूसरे राज्यों में बदलते राजनीतिक रिश्तों के बीच सहयोगियों को प्रतिनिधित्व देने पर विचार किए जाने की चर्चा है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु में डीएमके और महाराष्ट्र में एनसीपी (शरद पवार गुट) से जुड़े संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी अटकलें हैं। हालांकि, इन्हें फिलहाल संभावनाओं और राजनीतिक चर्चाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

14 मंत्रियों के पास कई मंत्रालय, घट सकता है बोझ

फेरबदल का एक और बड़ा कारण मंत्रियों पर बढ़ता काम का बोझ हो सकता है। फिलहाल 14 मंत्री एक से ज्यादा मंत्रालय या विभाग संभाल रहे हैं। संभावित फेरबदल में इन जिम्मेदारियों को अलग-अलग मंत्रियों के बीच बांटा जा सकता है। इनमें अमित शाह के पास गृह और सहकारिता, जेपी नड्डा के पास स्वास्थ्य तथा रसायन एवं उर्वरक, शिवराज सिंह चौहान के पास कृषि और ग्रामीण विकास, मनोहर लाल के पास आवास एवं शहरी मामले तथा बिजली जैसे महत्वपूर्ण विभाग हैं।

इसी तरह अश्विनी वैष्णव रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी जैसे कई अहम मंत्रालय संभाल रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया, किरेन रिजिजू, गजेंद्र सिंह शेखावत, मनसुख मांडविया और जी किशन रेड्डी समेत कई अन्य मंत्रियों के पास भी एक से ज्यादा विभाग हैं।

12 पद खाली, लेकिन असली खेल सिर्फ विस्तार का नहीं

इस समय सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि 12 खाली पदों पर कौन आएगा, बल्कि यह है कि मोदी सरकार अगले चरण के लिए अपनी टीम का संतुलन कैसे तैयार करती है? उम्र, प्रदर्शन, संगठन में नई जिम्मेदारी, सहयोगी दलों की मांग और 2027 के विधानसभा चुनाव, इन सभी फैक्टर को एक साथ देखा जा रहा है।

फिलहाल बीजेपी ने फेरबदल की तारीख या संभावित मंत्रियों की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। इसलिए सामने आ रहे नामों को संभावित दावेदार और राजनीतिक अटकलें मानना ही उचित है।

एक नजर में पूरी लिस्ट, कौन होगा आउट?

हर्ष मल्होत्रा: दिल्ली बीजेपी की जिम्मेदारी मिलने के बाद मंत्री पद छोड़ने की चर्चा

पंकज चौधरी: यूपी बीजेपी की कमान मिलने के बाद मंत्री पद को लेकर अटकलें

पीयूष गोयल : बीजेपी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाए जाने के बाद सरकार में भूमिका पर सवाल

हरदीप सिंह पुरी : नवंबर में राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के कारण भविष्य पर नजर

बीएल वर्मा : नवंबर में राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने के चलते संभावित बदलाव की चर्चा

जॉर्ज कुरियन : राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने के बाद मंत्री पद छोड़ चुके हैं

रवनीत सिंह बिट्टू : राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने के बाद मंत्री पद से बाहर हुए

धर्मेंद्र प्रधान : शिक्षा मंत्रालय से हटाए जाने के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव की कड़ी में नाम


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