फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी का खेल बेनकाब, कानपुर नगर निगम का बड़ा एक्शन; सफाई कर्मचारी की सेवा तत्काल समाप्त

फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी का खेल बेनकाब, कानपुर नगर निगम का बड़ा एक्शन; सफाई कर्मचारी की सेवा तत्काल समाप्त

जांच में पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र और वोटर आईडी पर गंभीर गड़बड़ी उजागर, मृत कर्मचारी की पत्नी होने का दावा भी नहीं हुआ साबित

(Today crime news)

उत्तर प्रदेश कानपुर। कानपुर नगर निगम ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए जलकल विभाग की एक सफाई कर्मचारी की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। विभागीय जांच में यह सामने आया कि मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति पाने के लिए प्रस्तुत किए गए महत्वपूर्ण दस्तावेज फर्जी और कूटरचित थे। जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद महाप्रबंधक एवं नियुक्ति प्राधिकारी ने सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया।

कार्यालय आदेश के अनुसार, जलकल विभाग में कार्यरत सफाई कर्मचारी स्वर्गीय संजू पुत्र अनिल की आकस्मिक मृत्यु के बाद वर्ष 2020 में श्रीमती बेबी को मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी दी गई थी। नियुक्ति के समय प्रस्तुत पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र के आधार पर उन्हें मृतक की पत्नी मानकर सेवा में लिया गया था।

मामले की जांच के दौरान पूरा घटनाक्रम पलट गया। उपजिलाधिकारी सदर, कानपुर नगर की जांच में पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र को फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जारी पाया गया, जिसके बाद उसे निरस्त कर दिया गया। इतना ही नहीं, जांच में यह भी उजागर हुआ कि नियुक्ति के समर्थन में प्रस्तुत किया गया वोटर आईडी कार्ड संबंधित महिला का न होकर किसी अन्य महिला का था।

विभागीय जांच समिति ने संबंधित कर्मचारी को आरोपों पर अपना पक्ष रखने और साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया, लेकिन वह यह साबित नहीं कर सकीं कि वह स्वर्गीय संजू की विधिवत विवाहित पत्नी थीं। जांच में मृतक के अन्य सरकारी अभिलेखों में भी उनका नाम पत्नी के रूप में दर्ज नहीं मिला, जिससे उनके दावे पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

जांच में यह भी सामने आया कि नियुक्ति के समय दिए गए शपथ पत्र में सभी दस्तावेजों को सही और सत्य घोषित किया गया था, जबकि सत्यापन में वही दस्तावेज फर्जी पाए गए। जांच समिति ने इसे गंभीर कदाचार और सरकारी सेवा प्राप्त करने के लिए धोखाधड़ी का मामला मानते हुए सेवा समाप्ति की संस्तुति की।

महाप्रबंधक एवं नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करना गंभीर अनियमितता है और इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर संबंधित सफाई कर्मचारी की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।

नगर निगम की इस कार्रवाई को फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने वालों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में भी नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी सामने आने पर इसी तरह कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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