धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की गूंज दुनिया तक: BBC, CNN, NYT समेत वैश्विक मीडिया ने बताया छात्र आंदोलन की बड़ी जीत

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की गूंज दुनिया तक: BBC, CNN, NYT समेत वैश्विक मीडिया ने बताया छात्र आंदोलन की बड़ी जीत

NEET पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजर, कई संस्थानों ने इसे मोदी सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश और छात्रों की ऐतिहासिक सफलता बताया।

(Today crime news)

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दे रही है। पिछले 36 दिनों से जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आए इस घटनाक्रम को दुनिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है। BBC, द गार्डियन, न्यूयॉर्क टाइम्स, CNN, अल जजीरा, डॉन, वॉल स्ट्रीट जर्नल और ब्लूमबर्ग जैसे वैश्विक मीडिया संगठनों ने इसे हाल के वर्षों में भारत के सबसे महत्वपूर्ण छात्र आंदोलनों में से एक बताया है।

अधिकांश अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह उल्लेख किया गया कि लगातार चले छात्र आंदोलन और बढ़ते जनदबाव के बीच सरकार को बड़ा राजनीतिक फैसला लेना पड़ा। कई संस्थानों ने इसे युवाओं की जवाबदेही की मांग, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक विरोध की प्रभावशीलता से जोड़कर देखा है।

BBC: सरकार को झुकना पड़ा

BBC ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आमतौर पर बड़े विरोध प्रदर्शनों के सामने झुकती नहीं रही है। रिपोर्ट के अनुसार किसान आंदोलन के बाद यह दूसरा प्रमुख अवसर माना जा रहा है, जब व्यापक जनदबाव निर्णायक साबित हुआ। BBC ने छात्र आंदोलन को इस्तीफे की प्रमुख वजहों में शामिल बताया।

द गार्डियन: 12 वर्षों में अभूतपूर्व घटनाक्रम

ब्रिटेन के अखबार द गार्डियन ने लिखा कि भाजपा शासन के 12 वर्षों में पहली बार प्रधानमंत्री मोदी के करीबी माने जाने वाले किसी केंद्रीय मंत्री को सार्वजनिक दबाव के बीच पद छोड़ना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार CJP के नेतृत्व में शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय छात्र अभियान में बदल गया और सरकार के सामने बड़ा राजनीतिक संकट बनकर उभरा।

न्यूयॉर्क टाइम्स: बयान से लेकर इस्तीफे तक का सफर

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में याद दिलाया कि धर्मेंद्र प्रधान ने पहले आंदोलनकारी छात्रों को गंभीरता से नहीं लिया था और एक इंटरव्यू में उन्हें "आतंकवादियों की बी-टीम" तक कहा था। रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन और तेज हुआ तथा अंततः छात्रों का दबाव इतना बढ़ा कि शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना पड़ा।

CNN: सोशल मीडिया से राष्ट्रीय आंदोलन तक

CNN ने लिखा कि शुरुआत में सोशल मीडिया पर मीम और ऑनलाइन अभियान के रूप में दिख रहा विरोध धीरे-धीरे देशभर के छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का बड़ा आंदोलन बन गया। रिपोर्ट के अनुसार इस आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, परीक्षा प्रणाली और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया।

अल जजीरा: छात्र आंदोलन की ऐतिहासिक सफलता

अल जजीरा ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्र आंदोलन की बड़ी जीत करार दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि हाल के वर्षों में यह मोदी सरकार के खिलाफ सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में शामिल रहा, जिसने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, परीक्षा प्रणाली और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया।

वॉल स्ट्रीट जर्नल और ब्लूमबर्ग: सरकार पर बढ़ता दबाव

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने प्रदर्शन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने हाल के वर्षों की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौतियों में से एक बताया। वहीं ब्लूमबर्ग ने लिखा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे और आंदोलन जारी रखने के ऐलान ने सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखा। रिपोर्ट में इसे 2021 के किसान आंदोलन के बाद राजधानी दिल्ली का सबसे बड़ा जनआंदोलन बताया गया।

डॉन. लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन ने लिखा कि पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन आखिरकार अपनी सबसे बड़ी मांग पूरी कराने में सफल रहा। रिपोर्ट के अनुसार इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय गान गाया, मिठाइयां बांटी और इसे लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बताया।

राजनीतिक असर पर भी वैश्विक नजर

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने केवल इस्तीफे की खबर तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इसके संभावित राजनीतिक प्रभावों का भी विश्लेषण किया। CNN ने भारत में युवा बेरोजगारी और रोजगार संकट को आंदोलन से जोड़ते हुए इसे व्यापक जनअसंतोष का संकेत बताया। वहीं ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि यह घटनाक्रम आगामी चुनावों, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में, सत्तारूढ़ दल के लिए नई चुनौती का संकेत माना जा रहा है।

वैश्विक सुर्खियों में भारतीय छात्र आंदोलन

NEET पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा मंत्री के इस्तीफे ने भारतीय छात्र आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। दुनिया के प्रमुख मीडिया संस्थानों की व्यापक कवरेज ने इस घटनाक्रम को केवल एक राजनीतिक फैसले तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही, युवाओं की भागीदारी और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग से जुड़े एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में प्रस्तुत किया है।

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