NEET विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, बोले देश की एकता और छात्रों के भविष्य के लिए लिया फैसला
(Today crime news)
नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए गए दो पन्नों के खुले पत्र में कहा कि जंतर-मंतर और देशभर में बनी परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने राष्ट्रहित, देश की एकता और विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेज दिया है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और NEET अभ्यर्थी पिछले 36 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की थी और उनका कहना था कि जब तक यह मांग पूरी नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा।
इस्तीफा पत्र में युवाओं और राष्ट्रहित का किया उल्लेख
अपने खुले पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि वे चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए कार्य करते रहे हैं तथा उनका हमेशा यह विश्वास रहा है कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था ही विकसित भारत की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं और उनके भविष्य का सम्मान करना उनका नैतिक दायित्व रहा है।
उन्होंने स्वीकार किया कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताएं सामने आने के बादकेंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामले की जांच CBI को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया। साथ ही, अगले वर्ष से परीक्षा कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित करने का फैसला भी लिया गया।
20 लाख छात्रों का भविष्य हमारी प्राथमिकता था
प्रधान ने अपने पत्र में कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की दोबारा परीक्षा को निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना थी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, अभिभावकों और विद्यार्थियों के सहयोग से 21 जून 2026 को पुनः परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित कराई गई।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने शुरू से ही इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी ली और कभी भी इससे पीछे नहीं हटे। उनका उद्देश्य किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया की वजह से प्रभावित न होने देना था।
युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश हुई
अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी लिखा कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG परिणाम संतोषजनक रहे, लेकिन इसके बावजूद कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने का प्रयास किया, जिससे उन्हें गहरा दुःख पहुंचा। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और उसे किसी भी भ्रम या भटकाव का शिकार नहीं होने देना चाहिए।
राष्ट्रहित में लिया त्यागपत्र का निर्णय
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के पीछे का कारण स्पष्ट करते हुए लिखा कि जंतर-मंतर और देश में बनी परिस्थितियों का लाभ राष्ट्रविरोधी ताकतें न उठा सकें, देश की एकता बनी रहे और किसी भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी विवादों में न उलझे, इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेजने का निर्णय लिया।
उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और भविष्य में भी वे देश, ओडिशा तथा युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए समर्पित रहेंगे।
36 दिन बाद आंदोलन को मिली पहली बड़ी सफलता
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे CJP कार्यकर्ताओं और छात्रों ने इसे अपनी पहली बड़ी जीत बताया। हालांकि संगठन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आंदोलन तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक उसकी अन्य मांगों ,प्रभावित छात्रों के परिवारों को मुआवजा, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों की वापसी और पुलिस कार्रवाई पर जवाबदेही पर भी सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती।



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