कानपुर सेंट्रल पर महिला यात्री की जेब नहीं, भरोसा भी हुआ चोरी! चोर की पहचान के बाद भी कार्रवाई नहीं, जीआरपी की कार्यशैली पर उठे सवाल

कानपुर सेंट्रल पर महिला यात्री की जेब नहीं, भरोसा भी हुआ चोरी! चोर की पहचान के बाद भी कार्रवाई नहीं, जीआरपी की कार्यशैली पर उठे सवाल

सोने की चेन और नकदी लेकर फरार हुई शातिर महिला, पीड़िता का आरोप, पहचान के बावजूद चोरी की जगह गुमशुदगी दर्ज कर पल्ला झाड़ रही पुलिस

                        पीड़िता महिला यात्री मंजू 

(Today crime news)

उत्तर प्रदेश कानपुर। देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल कानपुर सेंट्रल पर यात्रियों की सुरक्षा के दावों की एक बार फिर पोल खुल गई है। प्लेटफार्म पर ट्रेन में चढ़ने जा रही एक महिला यात्री का बैग खंगालकर शातिर चोर सोने की चेन और नकदी लेकर फरार हो गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़िता का दावा है कि जीआरपी द्वारा दिखाए गए सीसीटीवी फुटेज में उसने कथित चोर महिला की पहचान भी कर ली है, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इससे पीड़ित परिवार में भारी नाराजगी है और जीआरपी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

उन्नाव के गंगाघाट थाना क्षेत्र स्थित चम्पा का पुरवा निवासी मंजू वर्मा ने रेलवे पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में बताया कि वह 19 जून की सुबह लगभग 6:45 बजे कानपुर सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-3 से फतेहपुर जाने के लिए ट्रेन संख्या 22442 के जनरल कोच में सवार होने जा रही थीं। इसी दौरान कुछ यात्रियों ने उन्हें बताया कि एक युवती उनके बैग से सामान निकालकर भाग रही है। सूचना मिलते ही मंजू ने शोर मचाया, लेकिन भीड़ और अफरा-तफरी का फायदा उठाकर कथित चोर महिला मौके से फरार हो गई।

पीड़िता के अनुसार बैग में करीब 10 से 10.5 ग्राम सोने की चेन, लगभग 11 हजार रुपये नकद और अन्य जरूरी सामान रखा था। घटना के बाद उन्होंने तत्काल जीआरपी को सूचना दी और शिकायत दर्ज कराई।

मामले ने तब नया मोड़ लिया जब जांच के दौरान जीआरपी ने सीसीटीवी फुटेज और संदिग्धों की तस्वीरें पीड़िता को दिखाईं। मंजू वर्मा और उनके परिजनों का दावा है कि उन्होंने फुटेज में दिखाई गई महिला की स्पष्ट पहचान कर ली। इतना ही नहीं, उनका आरोप है कि वारदात किसी एक व्यक्ति का काम नहीं बल्कि संगठित गिरोह की करतूत है। पीड़िता के मुताबिक भागते समय कथित चोर महिला ने चोरी का सामान अपनी एक महिला साथी को सौंप दिया और दोनों अलग-अलग दिशाओं में निकल गईं।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब संदिग्ध की पहचान हो चुकी है और सीसीटीवी जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य भी मौजूद हैं, तब भी जीआरपी की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है। परिवार का कहना है कि चोरी की घटना को गंभीरता से लेने के बजाय उनकी शिकायत को गुमशुदगी के रूप में दर्ज कर दिया गया, जिससे पूरे मामले को कमजोर करने की कोशिश प्रतीत होती है।

कानपुर सेंट्रल जैसे हाई सिक्योरिटी स्टेशन पर दिनदहाड़े हुई यह घटना रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है। यात्रियों का कहना है कि यदि सीसीटीवी में कैद संदिग्धों की पहचान होने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है, तो आम यात्रियों की सुरक्षा आखिर किस भरोसे है? अब निगाहें जीआरपी और रेलवे प्रशासन पर टिकी हैं कि वे पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी सरकारी दावों और फाइलों के बीच दम तोड़ देगा।

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