Board of Control for Cricket in India का मास्टरप्लान: दिग्गजों की देखरेख में निखरेंगे युवा गेंदबाज
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बेंगलुरु। भारतीय क्रिकेट में भविष्य की तैयारी अब जमीनी स्तर पर तेज होती नजर आ रही है। Board of Control for Cricket in India (बीसीसीआई) ने गेंदबाजी विभाग को और सशक्त बनाने के लिए अपने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ‘स्पेशलिस्ट क्लीनिक मॉडल’ की शुरुआत की है। इस पहल के तहत पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों को सीधे उभरती प्रतिभाओं के साथ जोड़ा जा रहा है।
जहीर खान ने संभाली तेज गेंदबाजों की कमान
पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज Zaheer Khan ने हाई-परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग ग्रुप के उभरते पेसरों के लिए आयोजित विशेष रेड-बॉल कैंप का नेतृत्व किया। तीन दिनों तक चले इस सत्र में 15 से अधिक युवा तेज गेंदबाजों को टेस्ट क्रिकेट की बारीकियां सिखाई गईं।
कैंप का फोकस लंबी अवधि के क्रिकेट में सटीक लाइन-लेंथ, धैर्य और रणनीतिक सोच विकसित करने पर रहा। जहीर ने विशेष रूप से पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग हासिल करने की तकनीक, विदेशी परिस्थितियों में गेंदबाजी की चुनौतियों और बल्लेबाजों को योजनाबद्ध तरीके से आउट करने की रणनीतियों पर मार्गदर्शन दिया।
बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “जहीर खान का अंतरराष्ट्रीय अनुभव इन युवाओं के लिए अमूल्य है। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे देशों के आगामी दौरों को ध्यान में रखते हुए इस तरह का प्रशिक्षण बेहद महत्वपूर्ण है।
स्पिन विभाग में भी बदलाव की तैयारी
तेज गेंदबाजी कैंप की सफलता के बाद अब बोर्ड स्पिन विभाग को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। पूर्व दिग्गज ऑफ-स्पिनर Harbhajan Singh से विशेष स्पिन क्लीनिक का नेतृत्व करने के लिए संपर्क किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, Indian Premier League 2026 के आगाज से पहले बेंगलुरु में आयोजित होने वाले इस क्लीनिक में खासतौर पर ऑफ-स्पिनरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। घरेलू क्रिकेट में गुणवत्ता वाले ऑफ-स्पिनरों की कमी को देखते हुए यह कदम भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
दीर्घकालिक सोच का हिस्सा
बीसीसीआई का यह ‘स्पेशलिस्ट क्लीनिक मॉडल’ केवल अल्पकालिक समाधान नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बोर्ड अब प्रतिभाओं की पहचान के साथ-साथ उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर भी जोर दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय टीम को तेज और स्पिन—दोनों विभागों में नई मजबूती मिल सकती है, जो विदेशी दौरों पर बेहतर प्रदर्शन की नींव रखेगी।


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