बिहार वोटर लिस्ट पर कांग्रेस की खामोशी: SIR पर तेज़ अभियान के बाद अब रणनीति में बदलाव के संकेत?

बिहार वोटर लिस्ट पर कांग्रेस की खामोशी: SIR पर तेज़ अभियान के बाद अब रणनीति में बदलाव के संकेत?

बिहार पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मतदाता सूची (Voter List) को लेकर विपक्षी दलों, खासतौर पर कांग्रेस, ने जिस तरह से सवाल खड़े किए थे, उससे यह मुद्दा राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया था। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और महासचिव राहुल गांधी ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के खिलाफ राज्यभर में वोटर अधिकार यात्रा निकालकर इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया था। लेकिन अब जब चुनाव आयोग ने फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी है, तो कांग्रेस की ओर से आश्चर्यजनक रूप से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इस खामोशी ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या कांग्रेस किसी विस्तृत रणनीति के इंतजार में है? या फिर फील्ड रिपोर्ट्स और डेटा के विश्लेषण के बाद ही पार्टी कोई ठोस रुख अपनाएगी?

क्या है SIR और इसके नतीजे?

चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 से SIR की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसका उद्देश्य था:

फर्जी और विदेशी नागरिकों को मतदाता सूची से हटाना

दोहराए गए व स्थानांतरित मतदाताओं को निकालना

नए योग्य मतदाताओं को जोड़ना

इस व्यापक प्रक्रिया के अंतर्गत 7.24 करोड़ मतदाताओं से संबंधित डेटा इकट्ठा किया गया। आयोग के अनुसार, प्रक्रिया में 99.8% कवरेज हासिल किया गया।

फाइनल वोटर लिस्ट के मुख्य आंकड़े:

कुल मतदाता (पहले): 7.89 करोड़

फाइनल लिस्ट के बाद: 7.42 करोड़

कुल 69.29 लाख नाम हटाए गए

21.53 लाख नए मतदाता जोड़े गए

22.34 लाख मृत पाए गए

6.85 लाख लोगों के नाम दो जगह दर्ज थे

36.44 लाख लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके थे

पटना में 1.63 लाख वोटर्स की बढ़ोतरी

सारण में 2.24 लाख नाम हटे

कांग्रेस की चुप्पी: रणनीति या असमंजस?

राहुल गांधी ने SIR को लेकर अपने अभियान के दौरान तीखे सवाल उठाए थे। उन्होंने इसे मतदाता अधिकारों पर हमला करार दिया था और इसे "लोकतंत्र पर खतरा" बताया था। लेकिन अब जबकि फाइनल लिस्ट जारी हो चुकी है, कांग्रेस आलाकमान और खुद राहुल गांधी की ओर से कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।

बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

"फाइनल लिस्ट की आंतरिक जांच चल रही है। हमारे कार्यकर्ता ज़मीनी स्तर पर यह आंकलन कर रहे हैं कि कितने नाम जोड़े गए और कितने हटाए गए। यह मामला यहीं खत्म नहीं होगा।"

पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि अगर SIR का मुद्दा जमीनी स्तर पर मतदाताओं को पर्याप्त रूप से प्रभावित नहीं कर रहा है, तो कांग्रेस को अपने फोकस को सत्तारूढ़ जेडीयू-भाजपा गठबंधन की नीतियों और उनके प्रभाव पर केंद्रित करना चाहिए।

राजनीतिक असर और आगे की रणनीति

SIR के जरिए बड़े पैमाने पर नाम काटे और जोड़े गए हैं, जिससे कई सीटों पर चुनावी गणित बदल सकता है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह प्रक्रिया ऐसे समय की गई जब चुनाव नजदीक हैं, जिससे लाखों मतदाता सूची से बाहर हो गए।

वहीं, कांग्रेस की रणनीतिक चुप्पी यह संकेत देती है कि पार्टी फिलहाल डेटा और फील्ड रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है और जल्द ही इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया दे सकती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, AICC फाइनल लिस्ट पर विश्लेषणात्मक रिपोर्ट मंगवा रही है ताकि आयोग के दावों की वस्तुनिष्ठ समीक्षा की जा सके।

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