ईद का चांद दिखते ही पूरा हुआ ऐतिकाफ
मुल्क में खुशहाली व अमन चैन की दुआ कर मस्ज़िद से निकले ऐतिकाफ में बैठे नमाज़ी।
कानपुर घंटाघर बड़ी मस्ज़िद में 10 दिनों से ऐतिकाफ में बैठे मस्ज़िद के इमाम मुफ्ती उस्मान कासमी साहब व अन्य लोग 10 दिन से ऐतिकाफ में बैठे थे आज ईद का चांद नज़र आते ही ऐतिकाफ पूरा हुआ और मस्ज़िद में निकलने से पहले रो रो कर मुल्क की सलामती और चैन ओ अमन की दुआ की उसके बाद मस्ज़िद के बाहर आए
क्या होता है ऐतिकाफ
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जो शक्स भी ऐतिकाफ में बैठता है उसको मस्ज़िद से बाहर की दुनिया से सम्पर्क तोड़ना पड़ता हैं यहां तक कि घर वालो से भी और सिर्फ़ प्रार्थना इबादत में ही मशगूल रहता है मस्जिद के उस हिस्से में जहा से न मस्ज़िद के बाहर का नज़ारा दिखे न आसमा अगर किसी को ऐतिकाफ में बैठे शक्श से मुलाकात करना हैं तो वो मस्ज़िद में जाकर मिल सकता है लेकिन ऐतिकाफ में बैठने वाला व्यक्ति मस्ज़िद से बाहर नहीं जा सकता।
ऐतिकाफ रमज़ान की इक्कीसवीं शब्द से सुरु हो जाता है और लोग अपनी अपनी नियत के हिसाब से 10दिन 5 दिन व 3 दिन बैठते हैं और ईद का चांद दिखने के बाद ही ऐतिकाफ पूरा होता है। मस्ज़िद कमेटी ने इमाम मुफ्ती उस्मान कासमी साहब और एतिकाफ में बैठे लोगों का किया सम्मान।


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