8 साल पहले युवक की हत्या कर साक्ष्यों को मिटाने को अंजाम देने मे महिला और तीन आरोपितों को आजीवन करावास की सजा। एक बरी
हत्या कर शव गायब करने की कोशिस...
जिला कन्नौज-:
शासकीय अधिवक्ता यतेंद्रपाल सिंह ने बताया कि छह मई 2013 को उन्नाव जनपद के थाना हसनगंज में ठठिया थाना क्षेत्र के ग्राम भुन्ना निवासी आशीष शुक्ला ने अज्ञात लोगों के खिलाफ चचेरे भाई विपिन शुक्ला की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। विपिन का शव हसनगंज क्षेत्र के जगदीशपुर गांव में शारदा नहर में मिला था। बाद में यह मुकदमा ठठिया स्थानांतरित कर दिया गया। तत्कालीन थानाध्यक्ष संतोष कुमार तिवारी ने विवेचना की तो कॉल डिटेल के आधार पर हरदोई जनपद के थाना मल्लावां क्षेत्र के ग्राम सराय सुल्तान निवासी शफीक पुत्र नसीम, रेहान पुत्र फरीद, मुजीब पुत्र मंगली तथा गांव प्रतापपुर ठठिया निवासी नीलम पुत्री मुलायम सिंह को आरोपित बनाकर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। विपिन की बाइक कानपुर नगर के बिल्हौर थाना क्षेत्र में बरामद हुई थी। गुरुवार को फास्ट ट्रैक काेर्ट (प्रथम) के न्यायाधीश कासिफ शेख ने शफीक व नीलम को हत्या, साक्ष्य मिटाने व षड़यंत्र का दोषी पाकर दोनों को आजीवन कारावास तथा मुजीब के पास मृतक का सामान बरामद होने पर दोषी मानते हुए तीन वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है, जबकि रेहान को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। दाेषियों पर 55 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जुर्माने की आधी रकम मृतक के आश्रित को दी जाएगी।
प्रेम संबंधों में हुई थी विपिन की हत्या: शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि तीन मई 2013 को विपिन अपने बड़े भाई राजीव शुक्ला की शादी का कार्ड देने बहन कंचन के घर बांगरमऊ उन्नाव जा रहा था। अभियुक्ताें ने उन्हें रास्ते में पकड़ लिया तथा खुर्रमपुर में बालकराम के बाग में सिर में लोहे का पाइप मारकर हत्या कर दी तथा शव को उन्नाव जनपद के आसीवन नहर पुल से फेंक दिया था। विपिन के बहनोई के पिता विमलेश अग्निहोत्री ने शारदा नहर में एक लाश मिलने की सूचना दी, जिस पर स्वजन ने मौके पर जाकर शिनाख्त की थी। कोर्ट में 12 गवाह पेश किए गए। नीलम का पहले विपिन से प्रेम प्रसंग था। बाद में उसके शफीक से संबंध हो गए। इस पर आरोपितों ने विपिन की बेरहमी से हत्याकर शव को गायब कर दिया।
ससुराल से बिना बताए आती थी नीलम: शासकीय अधिवक्ता के मुताबिक जिस समय यह घटना हुई, उस समय नीलम कुंवारी थी। मुकदमे के ट्रायल के दौरान ही उसकी शादी हो गई लेकिन उसके ससुरालीजनों को मुकदमे की जानकारी नहीं थी। वह ससुरालीजनों को मुकदमे की तारीख की बात बताकर नहीं आती थी। गुरुवार को जब उसेे आजीवन कारावास की सजा हुई, तब भी वह अपनी ससुराल में बताकर नहीं आई थी।


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