पत्रकारों के उत्पीड़न के मामले में यूपी नंबर-1
योगी सरकार को सबसे ज़्यादा ख़तरा पत्रकारों से...
उत्तर प्रदेश में पत्रकारों के ख़िलाफ़ जिस तरह से प्रशासन धड़ाधड़ मुक़दमे दर्ज करा रहा है उससे तो यही लगता है कि प्रशासन और सरकार को सबसे ज़्यादा ख़तरा पत्रकारों से ही है और आने वाले दिनों में राज्य की जेलों में शायद सिर्फ़ पत्रकार ही दिखें।
"पत्रकार ने ख़बर लिखी और किसी को आपत्ति है तो उसके लिए फ़ोरम बने हैं. आप संपादक से शिकायत कर सकते हैं, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया में जा सकते हैं, यहां तक कि कोर्ट में भी जा सकते हैं. लेकिन ये थोड़ी न है कि आप उसके साथ अपराधी की तरह पेश आएंगे, मुकदमा कर देंगे। इससे साफ़ पता चलता है कि आलोचना सुनने की सहनशक्ति आप में नहीं है और आप प्रतिशोध की भावना से काम कर रहे हैं.
अगर उनकी ख़बरों या रिपोर्टों में कोई तथ्यात्मक त्रुटि है, उससे किसी को ठेस पहुंच रही है या फिर किसी को कोई आपत्ति है तो उसकी शिकायत के लिए अलग फ़ोरम बने हुए हैं, न कि सीधे मुकदमा।
प्रकरण में पुलिस की उदासीनता को देखते हुए ऑल इंडियन रिपोर्टर्स एसोसिएशन (आईरा) के जिलाध्यक्ष आशीष त्रिपाठी महामंत्री मयंक सैनी ने रोष व्यक्त करते हुए अपने संगठन के अन्य सदस्यों के साथ कानपुर आई जी मोहित अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा। इस मुहिम में एडवोकेट राजीव द्विवेदी ने भी पत्रकारों का साथ देते हुए कहा कि वह स्वयं पीड़ित पत्रकारों के मामले को कानपुर न्यायालय से लेकर हाई कोर्ट तक जाएंगे और जिन पत्रकारों पर फर्जी मुकदमे लगाए गए हैं उन्हें वापस करवाएंगे।


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