महापौर-नगर आयुक्त फिर आमने-सामने, चार मुद्दों पर घिरेगा नगर निगम प्रशासन
महापौर-नगर आयुक्त फिर आमने-सामने, चार मुद्दों पर घिरेगा नगर निगम प्रशासन
कन्वेंशन सेंटर का एमओयू रद्द करने की घोषणा से बढ़ा टकराव, मंगल भवन, सफाई के निजीकरण और टेंडर नियमों पर मांगा जाएगा जवाब
(Today crime news)
उत्तर प्रदेश कानपुर। नगर निगम में प्रशासनिक फैसलों को लेकर महापौर प्रमिला पांडेय और नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के बीच टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को होने वाली कार्यकारिणी की बैठक में एक बार फिर दोनों आमने-सामने होंगे। मंगल भवन की समितियां भंग करने, सफाई व्यवस्था के निजीकरण, कन्वेंशन सेंटर के एमओयू और टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर नगर आयुक्त से जवाब मांगा जाएगा। पिछली बैठक में इन मुद्दों पर हुई तीखी नोकझोंक के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन अपने फैसलों का क्या आधार पेश करता है। महापौर का आरोप है कि नगर निगम में कई महत्वपूर्ण निर्णय कार्यकारिणी और सदन को विश्वास में लिए बिना किए जा रहे हैं।
उनका कहना है कि शहर से जुड़े बड़े फैसलों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सात अक्तूबर को हुई कार्यकारिणी की बैठक में इन मुद्दों पर सवाल उठने के बाद नगर आयुक्त ने जवाब देने के लिए दो दिन का समय मांगा था। इसके बाद दोबारा बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया। कन्वेंशन सेंटर के एमओयू को लेकर विवाद और गहरा गया है। महापौर ने कार्यकारिणी और सदन को जानकारी दिए बिना एमओयू किए जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे रद्द करने की घोषणा की थी। इस पर नगर आयुक्त ने विरोध जताया। अब इस मामले में निर्णय की प्रक्रिया और एमओयू की शर्तों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ सकती है। मंगल भवन की समितियां भंग किए जाने का मामला भी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
पार्षदों ने सवाल उठाया था कि कार्यकारिणी की अनुमति के बिना समितियों को भंग करने का फैसला किस आधार पर लिया गया। उनका कहना है कि नगर निगम से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में सदन और कार्यकारिणी की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए। टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी पार्षदों ने आपत्ति जताई है। उनके मुताबिक, सदन में व्यवस्था बनाई गई थी कि एस्टीमेट से 15 प्रतिशत से कम दर आने पर संबंधित टेंडर निरस्त किया जाएगा। समान दर आने की स्थिति में लॉटरी से चयन का प्रावधान भी तय किया गया था। आरोप है कि बाद में पीडब्ल्यूडी के नियमों का हवाला देकर निर्धारित दर से कम दर पर टेंडर डालने की छूट दी गई। पार्षदों ने सवाल उठाया कि सदन में तय व्यवस्था में बदलाव किस आधार पर किया गया और क्या इसके लिए सक्षम स्तर से अनुमति ली गई?
सफाई व्यवस्था के निजीकरण को लेकर भी सवाल बरकरार हैं। पार्षद इस प्रस्ताव की जरूरत, प्रक्रिया और सदन की सहमति को लेकर जवाब चाहते हैं। ऐसे में शुक्रवार की बैठक में केवल चार मुद्दों पर स्पष्टीकरण ही नहीं, बल्कि नगर निगम में प्रशासनिक अधिकारों और निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी बहस होने के आसार हैं। अब देखना यह है कि नगर आयुक्त के जवाब से विवाद सुलझता है या नगर निगम में टकराव और बढ़ता है।
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चार मुद्दे, जिन पर मांगा जाएगा जवाब
कन्वेंशन सेंटर के एमओयू की प्रक्रिया और उसे रद्द करने की घोषणा। मंगल भवन की समितियां भंग करने का आधार, सफाई व्यवस्था के निजीकरण का प्रस्ताव, टेंडर नियमों में बदलाव और कम दरों पर निविदा की छूट।
पिछली बैठक में क्या हुआ था?
सात अक्तूबर की बैठक में तीन प्रमुख सवालों पर तीखी नोकझोंक हुई।नगर आयुक्त ने जवाब देने के लिए दो दिन का समय मांगा। महापौर ने कार्यकारिणी और सदन को विश्वास में लेकर फैसले करने पर जोर दिया। जवाब के लिए दोबारा बैठक बुलाने का निर्णय हुआ।
टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
पार्षदों के मुताबिक, सदन में एस्टीमेट से 15 प्रतिशत कम दर आने पर टेंडर निरस्त करने और समान दर होने पर लॉटरी से चयन का प्रावधान तय किया गया था। आरोप है कि बाद में पीडब्ल्यूडी के नियमों का हवाला देकर कम दर पर टेंडर डालने की छूट दी गई। पार्षद जानना चाहते हैं कि इस बदलाव का आधार क्या है और इसके लिए किस स्तर पर निर्णय लिया गया।



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