नगर निगम के ठेके, भुगतान और एसआईटी जांच पर उठे सवाल, 28 अक्टूबर को महापौर ने बुलाई बैठक
तीन साल के कूड़ा निस्तारण ठेकों से लेकर बजट और ऑडिट रिपोर्ट तक होगी समीक्षा, वेबसाइट पर खर्च का ब्योरा सार्वजनिक करने का मुद्दा भी एजेंडे में
(Today crime news)
उत्तर प्रदेश कानपुर। नगर निगम में ठेकों, भुगतान, बजट और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर अब कार्यकारिणी की विशेष बैठक में चर्चा होगी। महापौर प्रमिला पांडेय ने 28 अक्टूबर को दोपहर दो बजे बैठक बुलाई है। पहले यह बैठक 24 अक्टूबर को प्रस्तावित थी, लेकिन अपरिहार्य कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया था। महापौर की ओर से जारी पत्र में उपसभापति अभिज्ञव शुक्ला ‘गोलू’ और अन्य पार्षदों के तीन पत्रों का हवाला देते हुए विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक का एजेंडा नगर निगम के वित्तीय कामकाज, ठेकों और भुगतान की प्रक्रिया, पार्षदों को समितियों से हटाने, लेखा रिकॉर्ड तथा विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) के गठन से जुड़े सवालों पर केंद्रित है। संबंधित अधिकारियों से निर्धारित बिंदुओं पर तथ्यात्मक आख्या और आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया है। ऐसे में बैठक में इन मामलों से जुड़े रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर चर्चा महत्वपूर्ण होगी।
तीन साल के ठेकों और भुगतान का खुलेगा रिकॉर्ड
कार्यकारिणी की बैठक में पिछले तीन वर्षों के डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रह और लीगेसी वेस्ट के निस्तारण से संबंधित ठेकों की समीक्षा प्रस्तावित है। इसमें निविदाओं, अनुबंधों और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड पर चर्चा होगी। इसके साथ विभिन्न समितियों से पार्षदों को हटाए जाने के मामलों तथा नगर निगम सदन और कार्यकारिणी के पूर्व निर्णयों के अनुपालन की स्थिति भी समीक्षा के दायरे में रहेगी।
इन बिंदुओं के जरिए यह देखा जाएगा कि संबंधित प्रक्रियाओं और निर्णयों से जुड़े अभिलेख किस स्थिति में हैं तथा निर्धारित नियमों के अनुपालन को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।
बजट और खर्च का ब्योरा वेबसाइट पर डालने का मुद्दा
नगर निगम निधि से स्वीकृत कार्यों, निविदाओं, बजट आवंटन और व्यय का विवरण आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करने का मुद्दा भी बैठक के एजेंडे में शामिल है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक धन से कराए जाने वाले कार्यों और उनके खर्च की जानकारी आम नागरिकों तथा जनप्रतिनिधियों तक सुलभ बनाने की व्यवस्था पर चर्चा करना है।
यदि इस संबंध में कोई ठोस निर्णय होता है, तो नगर निगम के वित्तीय कामकाज की जानकारी सार्वजनिक करने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।
तीन वित्तीय वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट पर भी चर्चा
वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की मासिक लेखापरीक्षा रिपोर्ट, स्थानीय निधि लेखापरीक्षा प्रतिवेदन तथा मासिक आय-व्यय विवरण के प्रकाशन की स्थिति भी एजेंडे में शामिल है। इसके अलावा संबंधित वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी।
बैठक में यह विषय भी उठेगा कि नगर निगम के वित्तीय रिकॉर्ड और ऑडिट संबंधी रिपोर्टों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तैयार करने तथा उपलब्ध कराने की स्थिति क्या है।
एसआईटी के गठन और अधिकार क्षेत्र पर उठेंगे सवाल
नगर निगम के कार्यों की जांच के लिए गठित विशेष अन्वेषण दलों (एसआईटी) के गठन का आधार, संबंधित आदेश और अधिकार क्षेत्र भी चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में शामिल हैं। इन मामलों में प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुपालन से जुड़े तथ्यों की समीक्षा की जानी है।
गौरतलब है कि बैठक के एजेंडे में शामिल सवाल अपने आप में किसी अनियमितता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं। संबंधित मामलों में वास्तविक स्थिति अभिलेखों, आदेशों और अधिकारियों की तथ्यात्मक आख्या से ही स्पष्ट होगी।
28 अक्टूबर की बैठक पर टिकी निगाहें
ठेकों और भुगतान से लेकर ऑडिट रिपोर्ट तथा एसआईटी की प्रक्रिया तक, बैठक में शामिल विभिन्न बिंदु नगर निगम के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े हैं। अब देखना होगा कि 28 अक्टूबर को होने वाली विशेष बैठक में इन मुद्दों पर क्या तथ्य सामने आते हैं और रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, वित्तीय प्रक्रियाओं की समीक्षा तथा जांच संबंधी सवालों पर क्या निर्णय लिए जाते हैं।


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