स्कूल से शुरू हुआ विवाद, सियासी संग्राम में बदला; CJP-BJP आमने-सामने
(Today crime news)
जयपुर/बगरू। राजस्थान की राजधानी जयपुर के बगरू इलाके का रामपुरा कनवारपुरा गांव अब सिर्फ जर्जर सरकारी स्कूल को लेकर चर्चा में नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत गांव पहुंची टीम और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प ने अब सियासी रंग ले लिया है। एक तरफ CJP ने हमले के पीछे BJP से जुड़े लोगों का हाथ होने का आरोप लगाया है, तो दूसरी तरफ ग्रामीणों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि विरोध गांव के लोगों ने अपने स्तर पर किया था। मामला अब पुलिस तक पहुंच चुका है और दोनों पक्षों की शिकायत पर FIR दर्ज होने से विवाद और गंभीर हो गया है।
स्कूल देखने पहुंचे, गांव में शुरू हो गया संग्राम
21 अगस्त की सुबह CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका अपनी 5 से 7 सदस्यीय टीम के साथ रामपुरा कनवारपुरा गांव पहुंचे थे। टीम का उद्देश्य सरकारी स्कूल की कथित खस्ताहाल स्थिति का जायजा लेना था। लेकिन स्कूल तक पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों ने उनका विरोध शुरू कर दिया।
देखते ही देखते कहासुनी ने उग्र रूप ले लिया। धक्का-मुक्की, मारपीट और पत्थरबाजी के बीच CJP कार्यकर्ताओं के वाहनों के शीशे टूट गए। इसके बाद पार्टी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि हमला BJP नेताओं के इशारे पर आए लोगों ने किया।
आशुतोष रांका का दावा है कि उनके पास घटना के वीडियो सबूत मौजूद हैं और हमला सुनियोजित था। वहीं CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी BJP से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए।
ग्रामीणों का पलटवार—‘हम BJP के गुंडे नहीं, गांव के लोग हैं
दूसरी ओर गांव के लोगों ने CJP के आरोपों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताया। विरोध में शामिल लोगों का कहना है कि उन्होंने टीम को गांव और स्कूल में प्रवेश से रोकने का प्रयास किया, लेकिन हमले के आरोप बेबुनियाद हैं।
विरोध कर रहे लालचंद शर्मा का नाम BJP से पुराने जुड़ाव के कारण चर्चा में आया, लेकिन उनका कहना है कि वह फिलहाल किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं। उनके अनुसार, ग्रामीणों को CJP टीम के आने की पहले से जानकारी नहीं थी। गांव में सूचना मिलने के बाद लोगों ने सामूहिक रूप से टीम को स्कूल में प्रवेश नहीं देने का फैसला किया।
ग्रामीण शंकरलाल शर्मा उर्फ बागड़ा का कहना है कि लोगों ने CJP टीम से कई बार हाथ जोड़कर वापस जाने की अपील की थी। उनका तर्क है कि गांव में BJP समर्थक हो सकते हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि पार्टी के नेताओं या कार्यकर्ताओं ने हमला कराया।
18 लाख मंजूर, फिर भी स्कूल बना सियासी रणक्षेत्र
गांव के लोगों का दावा है कि सरकारी स्कूल की मरम्मत के लिए विधायक की ओर से 18 लाख रुपये पहले ही मंजूर किए जा चुके हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि जब स्कूल के लिए बजट स्वीकृत है तो फिर इस मुद्दे को लेकर बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप की जरूरत क्यों पड़ी?
ग्रामीण रामअवतार शर्मा ने यह भी दावा किया कि गांव के लोग सामूहिक प्रयास से मंदिर निर्माण पर एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुके हैं। उनका कहना है कि यदि सरकारी स्तर पर स्कूल की समस्या का समाधान नहीं होता तो गांव वाले स्वयं भी मरम्मत या निर्माण का रास्ता निकाल सकते हैं।
विधायक पहुंचे, CJP पर सवाल—‘ग्रामीणों को गुंडा कहने का अधिकार किसे?
विवाद बढ़ने के बाद बगरू विधायक कैलाश वर्मा भी गांव पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। विधायक ने कहा कि रामपुरा की पहचान एक अच्छे गांव के रूप में रही है और स्कूल के लिए 18 लाख रुपये पहले ही स्वीकृत किए जा चुके हैं।
CJP द्वारा ग्रामीणों को कथित तौर पर गुंडा कहे जाने पर विधायक ने नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ग्रामीण अपने गांव और स्कूल से जुड़े मुद्दे पर विरोध कर रहे हैं तो उन्हें अपराधी या गुंडा बताने का अधिकार किसे है।
अब पुलिस जांच तय करेगी,हमला था, विरोध था या सियासी टकराव?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर रामपुरा में हुआ क्या? CJP का आरोप है कि BJP से जुड़े लोगों ने सुनियोजित हमला किया, जबकि ग्रामीण इसे स्थानीय विरोध बता रहे हैं। दोनों पक्षों की शिकायत पर FIR दर्ज हो चुकी है।
पुलिस के सामने अब सिर्फ मारपीट और तोड़फोड़ की जांच नहीं, बल्कि उन राजनीतिक आरोपों की सच्चाई तलाशने की भी चुनौती है, जिन्होंने एक सरकारी स्कूल की बदहाली के मुद्दे को सीधे सियासी टकराव और आरोपों की जंग में बदल दिया है।
फिलहाल, यह स्पष्ट है कि रामपुरा का विवाद अब केवल स्कूल ठीक करो अभियान तक सीमित नहीं रहा। सवाल यह भी है कि स्कूल की बदहाली दूर करने की लड़ाई में राजनीति घुसी, या राजनीति के मैदान में स्कूल को हथियार बना दिया गया? इसका जवाब अब पुलिस जांच और सामने आने वाले सबूत ही देंगे।


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