झांसी ने बुझाया अतीक का एक और चिराग, अब कसारी-मसारी में अबान की कब्र भी कुनबे के बीच
(Today crime news)
उत्तर प्रदेश प्रयागराज। कभी प्रयागराज की सियासत और अपराध की दुनिया में अतीक अहमद के नाम का दबदबा था। आज उसी परिवार की कहानी का एक और पन्ना कसारी-मसारी कब्रिस्तान की मिट्टी में दफन हो गया। अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की छह अगस्त को झांसी में हुए सड़क हादसे में मौत के बाद शनिवार को उसे प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
जिस कसारी-मसारी कब्रिस्तान में कभी अतीक के परिवार की पीढ़ियां दफन होती रही हैं, वहीं अब उसके बेटों में से एक और बेटे की कब्र बन गई है। यह वही जगह है जहां अतीक अहमद, उसका भाई अशरफ और बेटा असद भी दफन हैं। इस तरह अतीक परिवार की त्रासदी का सिलसिला एक बार फिर उसी कब्रिस्तान की मिट्टी में जाकर ठहर गया।
झांसी... जहां पहले असद का एनकाउंटर हुआ, अबान की सड़क हादसे में मौत
अबान की मौत का झांसी से जुड़ाव महज एक संयोग बनकर सामने आया है। 13 अप्रैल 2023 को अतीक के बेटे **असद अहमद** को यूपी एसटीएफ ने झांसी में एनकाउंटर में मार गिराया था। उमेश पाल हत्याकांड में वांछित असद के साथ अतीक का करीबी शूटर गुलाम भी मारा गया था।
इसके ठीक दो दिन बाद 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में पुलिस कस्टडी के दौरान अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यानी कुछ ही दिनों के भीतर परिवार ने बेटे और फिर पिता-चाचा को खो दिया था।
अब करीब तीन साल बाद झांसी फिर अतीक परिवार की त्रासदी का गवाह बनी। छह अगस्त 2026 को अतीक के सबसे छोटे बेटे अबान की कार हादसे में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकरा गई। बताया गया कि सड़क पर अचानक जानवर आने के बाद चालक ने वाहन को बचाने की कोशिश की, इसी दौरान कार अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
अबान अपने जेल में बंद बड़े भाई अली अहमद से मिलने झांसी जा रहा था। रास्ते में हुआ हादसा उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ।
कसारी-मसारी: जहां अतीक के परिवार की कहानी कब्रों में दर्ज है
चकिया इलाके के पास स्थित कसारी-मसारी कब्रिस्तान अतीक अहमद के परिवार से गहरे तौर पर जुड़ा रहा है। यहीं उसके पिता हाजी फिरोज अहमद, मां, अतीक अहमद, अशरफ और बेटा असद दफन हैं। 2023 में असद को उसके दादा-दादी की कब्रों के बीच सुपुर्द-ए-खाक किया गया था। बाद में अतीक और अशरफ की कब्रें भी इसी कब्रिस्तान में बनीं। अबान की कब्र भी इसी कुनबे के बीच बन गई है। इस कब्रिस्तान की मिट्टी में अब अतीक परिवार की तीन पीढ़ियों की कहानी दिखाई देती है—एक तरफ पुरानी पीढ़ी की कब्रें हैं तो दूसरी तरफ अतीक और अशरफ की कब्रें, और उनके पास ही उनके बेटों में से असद और अबान की कब्रें।
एक परिवार, दो बेटों की मौत और दोनों बार झांसी
अतीक के परिवार के लिए झांसी अब सिर्फ उत्तर प्रदेश का एक शहर नहीं रह गया है। 2023 में यहीं असद की पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई और 2026 में इसी क्षेत्र में अबान की सड़क दुर्घटना में जान चली गई।
फर्क सिर्फ इतना था कि असद पुलिस कार्रवाई में मारा गया, जबकि अबान की मौत सड़क हादसे में हुई। दोनों घटनाओं ने अतीक परिवार के दो युवा सदस्यों की जिंदगी छीन ली। अबान की मौत के साथ परिवार की उस कहानी में एक और अध्याय जुड़ गया, जिसकी शुरुआत अपराध और सियासत के लंबे सफर से हुई थी और जिसका एक बड़ा हिस्सा आज कसारी-मसारी की कब्रों के बीच दिखाई देता है।
कसारी-मसारी में अब एक और कब्र
अतीक अहमद का नाम भले ही कभी प्रयागराज की सियासत और अपराध की दुनिया में ताकत का पर्याय रहा हो, लेकिन समय का पहिया ऐसा घूमा कि उसी परिवार के कई सदस्य अब एक ही कब्रिस्तान में आराम कर रहे हैं। अतीक, अशरफ, असद और अबान—चार नाम, जिनकी जिंदगी अलग-अलग मोड़ पर खत्म हुई, लेकिन अंतिम मंजिल एक ही बनी। कसारी-मसारी की मिट्टी अब अतीक परिवार की सिर्फ कब्रों को नहीं समेटे है, बल्कि उस परिवार के उत्थान, पतन और बिखराव की पूरी कहानी भी अपने भीतर दफन किए हुए है।


Post a Comment