बारिश में धंस रहा कानपुर, सड़कें बनीं खतरे का सबब
पीरोड पर 12 फीट गहरा गड्ढा, अशोक नगर में पाइपलाइन फटी; बजरिया ढाल में भी धंसी सड़क
(Today crime news)
उत्तर प्रदेश कानपुर। बारिश के साथ शहर की सड़कों के धंसने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुराने डॉट नाले और जर्जर पाइपलाइन शहरवासियों के लिए मुसीबत बन गए हैं। पीरोड से लेकर अशोक नगर, बजरिया ढाल और सेंट फ्रांसिस स्कूल के आसपास सड़कें क्षतिग्रस्त होने से हादसे का खतरा बढ़ गया है। कई स्थानों पर सड़क के बीच बड़े गड्ढे बन गए हैं, जबकि कुछ जगह मरम्मत का काम अधूरा पड़ा है। पीरोड पर बैंक ऑफ बड़ौदा के बाहर डॉट नाला धंसने से सड़क के बीच करीब 12 फीट गहरा गड्ढा हो गया है। व्यस्त सड़क पर बने इस गड्ढे के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय लोगों के अनुसार जरीब चौकी से बकरमंडी चौराहे के बीच कई जगह सड़क धंस चुकी है। इससे व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। अशोक नगर की 80 फीट रोड पर डॉट नाला धंसने के बाद सड़क की मरम्मत शुरू कराई गई थी। काम पूरा भी नहीं हुआ था कि कुछ दूरी पर त्रिमूर्ति मंदिर के पास जल निगम की पाइपलाइन फट गई। पाइपलाइन का पानी सड़क पर फैलने से सड़क के नीचे की मिट्टी के कटने का खतरा बढ़ गया है। पहले से कमजोर सड़क की स्थिति पाइपलाइन फटने के बाद और बिगड़ गई है।
अशोक नगर निवासी कन्हैया लाल ने बताया कि 80 फीट रोड के नीचे काफी पुराना डॉट नाला है। यह कई स्थानों पर धंस रहा है। उनका कहना है कि जल निगम की पाइपलाइन भी कई जगह से रिसती है। पानी जमीन के अंदर जाने से मिट्टी कटती है और सड़क धंस जाती है। सेंट फ्रांसिस स्कूल के बाहर नाले की मरम्मत तो कर दी गई, लेकिन सड़क की मरम्मत अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। बारिश के बीच अधूरी सड़क से लोगों को परेशानी हो रही है। स्कूल के बाहर आवाजाही अधिक होने के कारण यहां हादसे का खतरा भी बना हुआ है। बजरिया ढाल के पास बारिश के बाद सड़क का एक हिस्सा धंस गया। सड़क के नीचे की मिट्टी खिसकने से मार्ग प्रभावित हुआ है। इस रास्ते पर बड़ी संख्या में वाहनों और राहगीरों की आवाजाही रहती है। लगातार बारिश होने पर सड़क के और धंसने की आशंका बनी हुई है। शहर के कई इलाकों में वर्षों पुराने डॉट नाले आज भी सड़कों के नीचे हैं। इनकी जर्जर हालत और पानी के रिसाव से सड़क की नींव कमजोर हो रही है। बारिश में समस्या और गंभीर हो जाती है। कहीं सड़क बैठ रही है तो कहीं गहरे गड्ढे बन रहे हैं।



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