गढ़ी मछरिया तालाब पर संकट: गंदे पानी और उपेक्षा से दम तोड़ रहा प्राचीन जलस्रोत, छह हजार आबादी जलभराव से बेहाल

गढ़ी मछरिया तालाब पर संकट: गंदे पानी और उपेक्षा से दम तोड़ रहा प्राचीन जलस्रोत, छह हजार आबादी जलभराव से बेहाल

आवास विकास ने बसाई बस्ती, लेकिन जल निकासी की व्यवस्था नहीं,नगर निगम और विभाग एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी


(Today crime news)

उत्तर प्रदेश कानपुर। शहर के दक्षिणी क्षेत्र स्थित आवास विकास हंसपुरम का प्राचीन गढ़ी मछरिया तालाब आज प्रशासनिक उदासीनता और अव्यवस्थित शहरी विकास की कीमत चुका रहा है। कभी क्षेत्र के प्राकृतिक जल संरक्षण का प्रमुख स्रोत रहा यह तालाब अब गंदे पानी और कूड़े-कचरे का डंपिंग स्थल बनता जा रहा है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से हर बारिश में आसपास की करीब छह हजार आबादी को गंभीर जलभराव का सामना करना पड़ता है, जबकि तालाब का अस्तित्व भी लगातार खतरे में पड़ता जा रहा है।

वार्ड-41 (6-बी) स्थित पुनऊ बाबा मंदिर के समीप मौजूद इस प्राचीन तालाब के चारों ओर वर्ष 2016 में आवास विकास परिषद ने आवासीय प्लॉट विकसित कर लोगों को आवंटित किए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कॉलोनी तो बसा दी गई, लेकिन सीवर, नाले और वर्षा जल निकासी जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं की अनदेखी कर दी गई। नतीजतन अधिकांश घरों का गंदा पानी सीधे तालाब में पहुंच रहा है, जबकि कुछ लोग घरेलू कूड़ा-कचरा भी इसमें डाल रहे हैं। इससे तालाब की जलधारण क्षमता लगातार घट रही है और उसका प्राकृतिक स्वरूप नष्ट होता जा रहा है।

बारिश के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। क्षेत्र में जल निकासी का कोई प्रभावी इंतजाम न होने से दो से तीन फीट तक पानी भर जाता है और पूरा इलाका टापू में तब्दील हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव छह से सात दिन तक बना रहता है, जिससे आवागमन, स्कूली बच्चों की पढ़ाई, व्यापारिक गतिविधियां और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। जलभराव के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार आवास विकास परिषद, नगर निगम, स्थानीय विधायक, सांसद और अन्य अधिकारियों से शिकायत की गई। आवास विकास परिषद का कहना है कि कॉलोनी नगर निगम को हस्तांतरित की जा चुकी है, इसलिए अब निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम की है। वहीं नगर निगम की ओर से भी अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई, जिससे दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी तय न होने का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

निदान सिटीजन सेवा समिति के पदाधिकारियों विकास सिंह, रमेश कुमार वर्मा सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया कि तालाब के संरक्षण और सुंदरीकरण के लिए इसे अमृत सरोवर योजना में शामिल करने की मांग भी उठाई गई थी, लेकिन योजना बंद होने का हवाला देकर प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उनका कहना है कि लगभग दो वर्ष पूर्व तत्कालीन मुख्य अभियंता एस.एफ.ए. जैदी ने जल निकासी के लिए दो नालों के निर्माण का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक उस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि गढ़ी मछरिया तालाब के संरक्षण के लिए तत्काल ठोस कार्ययोजना बनाई जाए, जल निकासी के लिए स्थायी नालों का निर्माण कराया जाए तथा तालाब की नियमित सफाई और सुंदरीकरण सुनिश्चित किया जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो शहर का यह ऐतिहासिक जलस्रोत पूरी तरह समाप्त होने के साथ-साथ हजारों लोगों की जलभराव की समस्या भी और विकराल रूप ले सकती है।

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