राम मंदिर चढ़ावा मामला, 8 आरोपी गिरफ्तार, SIT जांच तेज, ट्रस्ट में इस्तीफों से मचा हड़कंप

राम मंदिर चढ़ावा मामला, 8 आरोपी गिरफ्तार, SIT जांच तेज, ट्रस्ट में इस्तीफों से मचा हड़कंप

(Today crime news)

उत्तर प्रदेश अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले ने शुक्रवार को बड़ा मोड़ ले लिया। अयोध्या पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के आधार पर आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जाएगा। दूसरी ओर, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरों ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चाओं के केंद्र में ला दिया है।

25 जून की रात दर्ज एफआईआर में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को नामजद किया गया है। पुलिस की कार्रवाई विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट और ट्रस्ट की शिकायत के आधार पर की गई।

जांच में सबसे अधिक चर्चा रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को लेकर है। जांच एजेंसियों के अनुसार उनके पास दानपात्रों की चाबियां होने तथा उनकी संपत्ति में असामान्य वृद्धि के आरोप सामने आए हैं। हालांकि टिन्नू यादव ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए अपनी संपत्ति को पुराना और वैध बताया है।

क्या हैं आरोप?

जांच एजेंसियों के अनुसार मंदिर में आने वाले नकद दान, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य चढ़ावे के रखरखाव तथा लेखा-जोखा में गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। आरोप है कि दानपात्रों से निकली राशि का समुचित रिकॉर्ड नहीं रखा गया, बहुमूल्य आभूषणों की सुरक्षा और सूचीकरण में लापरवाही हुई तथा कुछ धनराशि के दुरुपयोग की आशंका है। एसआईटी ने करीब 150 कर्मचारियों और सेवादारों की आर्थिक स्थिति की भी जांच की है।

सूत्रों के अनुसार जांच में 17 लोगों को संदिग्ध माना गया है, जबकि आगे की जांच में कुछ और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है। कथित हेराफेरी की राशि को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306 (कर्मचारी द्वारा चोरी), धारा 316(5) (आपराधिक न्यासभंग), धारा 317(4) व 317(5) (चोरी की संपत्ति से संबंधित अपराध), धारा 61 (आपराधिक साजिश) तथा धारा 3(5) (साझा आपराधिक दायित्व) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इन धाराओं में दोष सिद्ध होने पर कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।

उच्च पदाधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

चर्चा इस बात की भी है कि प्रारंभिक जांच में कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम सामने आने की बातें कही गई थीं, लेकिन दर्ज एफआईआर में केवल कर्मचारियों और मध्य स्तर के लोगों को नामजद किया गया है। इसे लेकर विपक्ष सरकार और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। हालांकि ट्रस्ट का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

शिकायतकर्ता कौन हैं?

इस मामले के शिकायतकर्ता कृष्ण मोहन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य हैं। भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारी कृष्ण मोहन को सितंबर 2025 में ट्रस्ट में शामिल किया गया था। वे लंबे समय तक सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों से जुड़े रहे हैं।

अखिलेश यादव का हमला

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एफआईआर दर्ज होने के बाद भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े लोगों को बचाने और छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की कोशिश की जा रही है। वहीं भाजपा और ट्रस्ट ने इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए खारिज किया है।

ट्रस्ट का पक्ष

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चढ़ावे में किसी भी प्रकार की अनियमितता से इनकार किया है। ट्रस्ट का कहना है कि दान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और जांच पूरी होने तक वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जा सकते। ट्रस्ट का यह भी कहना है कि एसआईटी के गठन की पहल स्वयं ट्रस्ट ने की थी।

अब आगे क्या

मामले की जांच अभी जारी है। आरोपियों से पूछताछ, वित्तीय रिकॉर्ड की जांच और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। इस बीच देशभर के श्रद्धालुओं की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होगी और यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। 

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