भारत देश में फिर हुई covid 19 कोरोना वायरस की दस्तक, 250 से अधिक केस
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Bharat Covid 19 भारत में महाराष्ट्र, केरल तमिलनाडु समेत कई राज्यों में अब तक 250 से भी ज्यादा कोविड-19 के केस मिल चुके हैं। 22 मई को ओडिशा के पुरी जिले में एक नया कोविड-19 मामला सामने आया है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अभी तक जो मामले सामने आए हैं, उसमें ज्यादातर हल्के हैं। इसमें कोई घबराने वाली बात नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों में एशिया के कई देशों जैसे हांगकांग, सिंगापुर, चीन और थाईलैंड, में कोविड-19 मामलों में फिर से बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके पीछे COVID-19 के नए वेरिएंट JN.1 स्ट्रेन और उसके सब-वेरिएंट LF.7 व NB.1.8 को जिम्मेदार माना जा रहा है। बढ़ते कोविड मामलों में JN.1 वेरिएंट पाया जा रहा है। JN.1 वेरिएंट और इसके सब-वेरिएंट LF.7 व NB.1.8 तेजी से फैल रहे हैं। हाल के जितने भी कोविड-19 के मामले देखे हए हैं, वो इसी वेरिएंट के हैं। ऐसे में JN.1 स्ट्रेन क्या है, इसके लक्षण, प्रभाव, बचाव के बारे में आइए जानें
वेरिएंट जेएएन.1 क्या है?
JN.1, ओमिक्रॉन के उप-वेरिएंट BA.2.86 की एक शाखा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे "Variant of Interest" माना है, न कि "Variant of Concern"। WHO का कहना है कि इस वेरिएंट से वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य को फिलहाल कम जोखिम है। यह तेजी से फैलता है लेकिन फिलहाल इसे गंभीर खतरे के रूप में नहीं देखा जा रहा है। WHO का कहना है कि ये कोरोना का कम जोखिम वाला वेरिएंट है लेकिन इसकी मॉनिटरिंग जरूरी है क्योंकि यह तेजी से फैल रहा है।
वेरिएंट जेएएन.1 के मुख्य लक्षण?
हल्का बुखार
गले में खराश
नाक बहना
सिरदर्द
अत्यधिक थकान
मांसपेशियों में कमजोरी
कभी-कभी पेट की समस्या, भूख में कमी
अधिकांश संक्रमित व्यक्तियों को ऊपरी श्वसन तंत्र में हल्के इंफेक्शन होना
लक्षण सामान्यत: हल्के होते हैं और 4-5 दिनों में सुधार हो जाता है।
JN.1 स्ट्रेन से कैसे रखें खुद को सुरक्षित, बचाव के उपाए
मास्क का उपयोग करें, खासकर भीड़भाड़ वाली जगहों पर
हाथ धोते रहें और सैनिटाइजर का प्रयोग करें
बीमार महसूस होने पर टेस्ट करवाएं और आइसोलेट रहें
बूस्टर डोज लेने में लापरवाही न करें
संक्रमण की गति
यह स्ट्रेन तेजी से फैलता है, लेकिन अब तक की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ज्यादा गंभीर बीमारी नहीं पैदा कर रहा है।
किसे ज्यादा खतरा?
बुजुर्ग, कमजोर इम्यून सिस्टम वाले और पहले से बीमार लोग अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
वैक्सीन लेने वालों में गंभीर संक्रमण का खतरा कम देखा गया है।


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