बीमारी से सैनिक की मौत
फर्रुखाबाद : बीमारी के चलते सैनिक की मौत हो गयी | सैनिक के शव का पांचाल गंगा तट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया | जनपद हरदोई के पाली भरखनी निवासी 33 वर्षीय दिवाकर वाजपेयी पुत्र बालमुकंद वर्ष 2009 में सेना नायक पंजाब के फिरोजापुर कैंट के 165 मीडियम रेजिमेंट में तैंनात हुए थे । जिनकी बीते दिन अचानक तबियत खराब होनें से मौत हो गयी | सैनिक का पार्थिव शरीर फर्रुखाबाद कि शहर कोतवाली क्षेत्र के पांचाल घाट गंगा तट पर लाया गया | जहाँ सवायजपुर एसडीएम स्वाती शुक्ला, सीओ हरपालपुर परशुराम सिंह, एसओ पाली संदीप सिंह की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया | शहीद के अंतिम दर्शन के लिए घाट पर लोगों का हुजूम उमड़ा |
वीओ - जानकारी के अनुसार जनपद हरदोई के गांव भरखनी निवासी दिवाकर बाजपेई का गुरुवार को पांचाल घाट पर साइन सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया शहीद के अंतिम संस्कार में दर्शन करने के लिए सैकड़ों की संख्या में भीड़ उमड़ी वही आलाधिकारियों ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी
बताते चलें कि गुरुवार की सुबह 165 मीडियम रेजीमेंट में तैनात सेनानायक दिवाकर बाजपेई पुत्र बालमुकुंद बाजपेई का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव भरखनी लाया गया । वह 2009 में सेना में भर्ती हुए थे । वहीं सूचना पर एसडीएम सवाइजपुर स्वाति शुक्ला, सीओ हरपालपुर परशुराम सिंह, एसओ पाली संदीप सिंह ने शहीद के गांव भरखनी पहुंच कर शहीद सैनिक के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित किए । उसके बाद सेना के बैंड की धुन पर शहीद के घर से पांचाल घाट तक अंतिम यात्रा शुरू हुई । सैनिक की अंतिम यात्रा में सैकड़ों की तादाद में लोगों की भीड़ उमड़ी । वहीं मीडियम रेजिमेंट के जवानों ने तीन राउंड हवा में गोलियां दागकर शहीद को अंतिम सलामी दी । शहीद के बड़े भाई ध्रुव कुमार बाजपेई ने चिता को मुखाग्नि दी । परिवार में चार भाइयों में तीसरे नंबर के दिवाकर की मौत ने हर किसी को दहला दिया ।
वही पैतृक गांव में जैसे ही सही दिवाकर बाजपेई का पार्थिव शरीर आया मानो पूरे गांव और क्षेत्र में आंसुओं की झड़ी लग गई । बच्चे बूढ़े और जवान माताएं और बहनें अपने इस बहादुर लाल की एक झलक देखने को उमड़ पड़े । गलियां और छतें से भीड़ से भरी थी ।
33 वर्षीय शहीद दिवाकर के दो बेटे लव कुश है । भारी भीड़ के बीच अमर शहीद दिवाकर बाजपेई अमर रहे भारत मां की जय के उद्घोष से आसमान गुंजायमान कर रहे थे । हर आंख बहादुपुर बेटे की मौत की खबर सुनकर बुजुर्ग मां गीता देवी सुध बुध खो बैठी तो वही पत्नी शालनी सच मानने को तैयार नहीं थी । पर नियत तो अपना खेल कर चुकी थी । परिजनों के करुण क्रंदन से हर कोई भावुक था । वहीं अंतिम दर्शनों के लिए लोग एक दूसरे को के ऊपर चढ़े जा रहे थे । जैसे ही शहीद दिवाकर के पार्थिव शरीर की अंतिम यात्रा के लिए गांव से निकाला गया तो जब तक सूरज चांद रहेगा दिवाकर तेरा नाम रहेगा । जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा । लोगों का कहना है कि यूं तो इंसान पैदा हुआ उसका मरना तो है । लेकिन देश सेवा के दौरान मिली सहादत इंसान को अमर कर जाती है ।
वाइट :-- शहीद दिवाकर बाजपेई के भाई

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