रेलवे परिसर में ठेकेदार मुन्ना के संरक्षण में बिक रहा है छिला खीरा विभाग मौन

रेलवे परिसर में ठेकेदार मुन्ना के संरक्षण में बिक रहा है छिला खीरा विभाग मौन

 कानपुर/रेलवे की सुरक्षा को लेकर विभागीय अधिकारी बड़े बड़े दावे पेश करते आए है परन्तु सच्चाई इससे बिल्कुल विपरीत दिखाई देती है विभाग की आखों में धूल झोंककर कई वेंडर ठेकेदारो के अधीन होकर खुलेआम अवैध सामग्री के साथ रेलवे परिसर डेरा डाले हुए है। 

कानपुर सेंट्रल इस वक्त कई अवैध कामो का अड्डा बना हुआ है जिसमे भोजन,से लेकर कई चीजें शामिल है परन्तु इस वक़्त रेलवे के प्लेटफार्मो पर सबसे ज्यादा कुछ बिक रहा हैं तो वो है खीरा जी हां इस वक़्त रेलवे में खीरे की बिक्री जोरो पर है कारण गर्मी की शिद्दत को शांत करने व पानी की कमी को पूरा करने के लिए यात्री खीरे का सेवन करना ही पसंद कर रहे है शायद इस बात का फायदा उठाकर ठेकेदार मुन्ना खोमचे में छिले खीरे बेच रहा है ठेकेदर मुन्ना ने खीरे की बढ़ती मांग को भापकर ही प्लेफार्म नo 9 के बाहर सुतरखाना रोड रेलवे की दीवार से सटाकर गोदाम बना लिया है जहां कई लड़के दिन भर खीरा छीलते है ट्रेन आते ही बोरियो में खीरा भरकर स्टेशन में मनमाने दामो पर यात्रियों को बेचना शुरु कर देते है 

  कौन है मुन्ना जो यात्रियों को लगा रहा है चुना

रेलवे में ना जाने कितने ठेकेदार आए चले गए वो ही ठेकेदार टिक पाए जो विभाग का संरक्षण पाए  ऐसे ही एक ठेकेदार का नाम सूत्रों द्वारा निकलकर सामने आया है जिसे लोग मुन्ना कहते है जिसकी सालो की मेहनत व विभाग में पकड़ की वजह से रेलवे में कई खोमचे सजते है जिस पर बैठकर उसके वेंडर खुलेआम यात्रियों को छिला खीरा बेचते है जबकि नियमानुसार कोई छिला कटा सड़ा फल रेलवे परिसर में नही बेच सकते है उसके बाद भी मुन्ना के खोमचो पर छिले खीरे बिक रहे है मुन्ना की सेटिंग का यही से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना काल की वजह दिन भर कई विभागीय अधिकारी पूरे परिसर में चहल कदमी करते है  मजाल है कोई उसके वेंडरों को टोक दे मुन्ना के अलावा ठेकेदार और भी ठेकेदार खोमचों पर अवैध वेंडर काबिज होकर छिले खीरे बेच रहे है अन्य ठेकेदारो को भी आशीर्वाद प्राप्त है इसलिए वो भी बिना डरे अपना काम धड़ल्ले से कर रहे है सूत्र बताते है कल तक दस रुपए को तरसने वाला मुन्ना नामक ठेकेदार रेलवे में छलांग मारते ही लाखो में खेल रहा है। 

  बाहर से दस गुना दाम में बिकता है रेलवे में खीरा

इस वक़्त शहर की गलियों में ठेलियों पर खीरा मारा मारा फिर रहा है जिसकी कीमत 50 पैसे से लेकर एक रुपए है इतना सस्ता होने के बावजूद कोई खीरे को भाव देता हुआ नही दिख रहा है लेकिन यही खीरा रेलवे परिसर में दस रुपए के ऊपर में धड़ल्ले से यात्रियों को बेचा जा रहा है अगर कोई यात्री इसका विरोध करता है तो वेंडर उस यात्री को धकियाते हुए कहते हैं लेना है तो लो वरना अपना रास्ता नापो यात्री बेचारा मजबूरी का शिकार होकर दस गुना महंगे खीरे को खरीदने पर मजबूर हो जाता है मजे की बात तो ये है कि ये सारा तमाशा रेलवे प्रशासन की आखों के सामने हो रहा है रेलवे अधिकारी इस अवैध प्रकरण में मूक दर्शक बने हुए है। 

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