रेलवे की रफ्तार और सुरक्षा को स्वदेशी तकनीक का दम देगा आईआईटी कानपुर

रेलवे की रफ्तार और सुरक्षा को स्वदेशी तकनीक का दम देगा आईआईटी कानपुर

बोगी और रेल डिब्बों के डिजाइन के लिए बनेगा उत्कृष्टता केंद्र, विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाने के साथ स्वदेशी अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा

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उत्तर प्रदेश कानपुर। भारतीय रेलवे को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में आईआईटी कानपुर ने महत्वपूर्ण पहल की है। संस्थान का रेल अनुसंधान केंद्र अब बोगी और रेल डिब्बों के डिजाइन, परीक्षण और तकनीकी विकास के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता मजबूत करने की तैयारी में है। इसी उद्देश्य से संस्थान में बोगी एवं रेल डिब्बा डिजाइन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और देश-विदेश के विशेषज्ञों ने आधुनिक रेल तकनीक, डिजाइन की विश्वसनीयता और उन्नत परीक्षण सुविधाओं के विकास पर विचार-विमर्श किया।

कार्यशाला में आईआईटी कानपुर में रेल डिब्बों और बोगी डिजाइन के लिए उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) स्थापित करने की योजना पर विशेष चर्चा हुई। प्रस्तावित केंद्र को भारतीय रेल, अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) और रेलवे उद्योग के लिए साझा अनुसंधान एवं परीक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना है। इससे रेल डिब्बों के डिजाइन और तकनीकी खामियों की पहचान के साथ स्वदेशी समाधान विकसित करने में मदद मिलेगी।

उत्तर मध्य रेलवे के प्रधान मुख्य यांत्रिक इंजीनियर अनिल कुमार द्विवेदी ने एलएचबी कोच में स्प्रिंग खराब होने, ब्रेक जाम होने और ब्रेक खुलने में देरी जैसी तकनीकी समस्याओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रेल डिब्बों की विश्वसनीयता और टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन के शुरुआती चरण से ही इन पहलुओं पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

बेस्को इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष ओपी टांटिया ने विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाकर देश में स्वदेशी तकनीक और बौद्धिक संपदा विकसित करने पर जोर दिया। कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में पहिया-पटरी की गतिशीलता, वर्चुअल प्रोटोटाइपिंग, बोगी परीक्षण, थकान आकलन और नए मालवाहक डिब्बों के डिजाइन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

वहीं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने साझा परीक्षण सुविधाओं के विकास में सहयोग और जनसहयोग से वित्तीय संसाधन जुटाने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक समर्थन दिया। इस पहल से रेलवे के लिए स्वदेशी डिजाइन, आधुनिक परीक्षण और अनुसंधान की नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है।

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