साइबर अपराध के खिलाफ योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई, ऑनलाइन शोषण में फंसे 24 बच्चे रेस्क्य
एनसीएमईसी और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल से मिली सूचनाओं पर कार्रवाई, यूपी पुलिस ने पीड़ित बच्चों की सुरक्षा के लिए तेज की जांच
(Today crime news)
उत्तर प्रदेश लखनऊ। Up में बच्चों को ऑनलाइन शोषण और साइबर उत्पीड़न से बचाने के लिए पुलिस ने महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए 24 बच्चों को रेस्क्यू किया है। राष्ट्रीय स्तर पर मिली साइबर टिपलाइन रिपोर्ट और शिकायतों के विश्लेषण के बाद की गई इस कार्रवाई में संबंधित जिलों की पुलिस ने समन्वय के साथ कदम उठाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों के बीच इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के साइबर क्राइम विभाग के अनुसार, कार्रवाई का आधार अमेरिका स्थित संस्था नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन (एनसीएमईसी) की साइबर टिपलाइन तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) से प्राप्त सूचनाएं और शिकायतें बनीं। इनका तकनीकी विश्लेषण करने के बाद संबंधित जिलों और पुलिस आयुक्तों को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा गया।
तकनीकी सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई
डीजी 112 बीके सिंह के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की ऑनलाइन साइबर क्राइम अगेंस्ट विमेन एंड चिल्ड्रेन (ओसीडब्ल्यूसी) इकाई महिलाओं और बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों से जुड़ी शिकायतों का विश्लेषण कर संबंधित राज्यों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों तक पहुंचाती है। उत्तर प्रदेश साइबर क्राइम मुख्यालय भी प्राप्त सूचनाओं की जांच कर उन्हें कार्रवाई के लिए संबंधित जिलों को भेजता है।
जिला स्तर पर शिकायतों का सत्यापन किया जाता है। प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध सामने आने पर नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कर डिजिटल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच की जाती है। आरोपितों की भूमिका और संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर गिरफ्तारी तथा न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल करने की कार्रवाई की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में पीड़ित बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाती है।
एनसीएमईसी और आई4सी के बीच समझौते से मजबूत हुई व्यवस्था
पुलिस के अनुसार, एनसीएमईसी और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के बीच एक अप्रैल 2024 से प्रभावी समझौता ज्ञापन के तहत भारत से संबंधित साइबर टिपलाइन रिपोर्ट सीधे आई4सी को प्राप्त होती हैं। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से भी ऑनलाइन शोषण और उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतें दर्ज की जाती हैं। पोर्टल पर शिकायतकर्ता अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए भी शिकायत कर सकते हैं।
इस व्यवस्था के तहत तकनीकी सूचनाओं का विश्लेषण, राज्यों के बीच समन्वय और जिला स्तर पर कानूनी कार्रवाई साइबर अपराधों की पहचान और पीड़ितों तक सहायता पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
सोशल मीडिया के जरिए बच्चों को निशाना बनाने की आशंका
साइबर अपराधी कई बार पहचान छिपाकर या पारिवारिक, पड़ोस और सामाजिक संबंधों का फायदा उठाकर बच्चों को निशाना बनाते हैं। कुछ मामलों में आपत्तिजनक तस्वीरों और वीडियो के जरिए बच्चों को डराने, ब्लैकमेल करने और उनका शोषण करने की कोशिश की जाती है। व्हाट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, स्नैपचैट और जीमेल जैसे डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग भी ऐसे अपराधों में हो सकता है।
बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराध उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकते हैं। ऐसे में समय पर शिकायत, डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण, त्वरित पुलिस कार्रवाई और पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
उत्तर प्रदेश पुलिस की इस कार्रवाई में 24 बच्चों को रेस्क्यू किया जाना महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए तकनीकी निगरानी के साथ-साथ अभिभावकों की सतर्कता, बच्चों में डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता और पीड़ितों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।


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