कागजों में चमकी सफाई व्यवस्था, हकीकत में गंदगी का साम्राज्य, IGRS पर शिकायत बंद, लेकिन समस्या बरकरार

कागजों में चमकी सफाई व्यवस्था, हकीकत में गंदगी का साम्राज्य, IGRS पर शिकायत बंद, लेकिन समस्या बरकरार

नगर निगम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल, बिना सफाई किए शिकायत निस्तारित करने के आरोप, जनता पूछ रही आखिर किसके लिए है जनसुनवाई व्यवस्था?


(Today crime news)

उत्तर प्रदेश कानपुर। सरकारी दफ्तरों में फाइलें भले ही तेजी से दौड़ रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। वार्ड-63, जोन-2 के राजीव नगर मदार पब्लिक स्कूल वाली के 25,30 घरों के कूड़े उठान नहीं हो रहा है। जिससे घरों के रहने वाले लोग क्षेत्र की गलियों में कूड़ा डाल देते हैं। सफाई व्यवस्था की पोल उस समय खुल गई, जब मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर दर्ज शिकायत का निस्तारण तो कर दिया गया, लेकिन गली की गंदगी जस की तस बनी रही। इस पूरे मामले ने नगर निगम की जवाबदेही और शिकायत निस्तारण प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्षेत्र निवासी विलास कुमार, मो. अनीश का आरोप है कि उनकी गली में कई दिनों से कूड़ा जमा है। आसपास की गलियों में नगर निगम की कूड़ा गाड़ियां नियमित रूप से पहुंच रही हैं, लेकिन उनकी गली को मानो व्यवस्था ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है। गंदगी, बदबू और बीमारी के खतरे के बीच जी रहे लोगों ने जब IGRS पर शिकायत संख्या 92616400045662 दर्ज कराई, तो उन्हें उम्मीद थी कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान करेंगे।

लेकिन आरोप है कि अधिकारियों ने कुर्सी पर बैठे-बैठे ही शिकायत का निस्तारण कर दिया। न सफाई हुई, न कोई टीम पहुंची, न हालात बदले, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में समस्या का समाधान दिखा दिया गया। जब हकीकत और सरकारी दावों का अंतर सामने आया तो पीड़ित ने दोबारा शिकायत संख्या 92616400048831 दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच की मांग की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायतों का निस्तारण इसी तरह कागजों पर होता रहा तो IGRS जैसी व्यवस्था जनता के लिए भरोसे का मंच नहीं, बल्कि औपचारिकता बनकर रह जाएगी। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर बिना मौके का निरीक्षण किए शिकायतों को बंद करने की जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है? क्या अधिकारियों की प्राथमिकता समस्या का समाधान है या केवल आंकड़ों में उपलब्धि दिखाना?

क्षेत्रवासियों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि गली की तत्काल सफाई कराई जाए, शिकायतों के कथित फर्जी निस्तारण की निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारियों व संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जब जनता की आवाज सरकारी पोर्टल तक पहुंचकर भी अनसुनी रह जाए, तो व्यवस्था पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है।

जनता का सीधा सवाल

जब गली में गंदगी मौजूद है, तो शिकायत का निस्तारण किस आधार पर कर दिया गया? क्या सरकारी सिस्टम में जमीनी सच्चाई से ज्यादा महत्व फाइलों और आंकड़ों का रह गया है?

अब देखना यह होगा कि नगर निगम प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है या फिर यह शिकायत भी सरकारी दावों और कागजी उपलब्धियों के बोझ तले दबकर रह जाती है।

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